रामकथा में रामलला के आदर्शों का हुआ गुणगान, भक्ति में डूबे श्रद्धालु
प्रखंड क्षेत्र के कोपवां गांव स्थित काली मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा के चौथे दिन गुरुवार को श्रद्धालु भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं से सराबोर नजर आए। कथा के दौरान भगवान श्रीराम के बाल चरित्र, उनके संस्कारों और आदर्शों का विस्तृत वर्णन किया गया, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।


केटी न्यूज/डुमरांव
प्रखंड क्षेत्र के कोपवां गांव स्थित काली मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा के चौथे दिन गुरुवार को श्रद्धालु भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं से सराबोर नजर आए। कथा के दौरान भगवान श्रीराम के बाल चरित्र, उनके संस्कारों और आदर्शों का विस्तृत वर्णन किया गया, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा स्थल पर देर शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही और पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजता रहा।राष्ट्रीय कथावाचक पंडित मधुसूदन बिहारी जी ने अपने प्रवचन में भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव और बाल्यकाल की विभिन्न घटनाओं का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीराम का जीवन मानवता, मर्यादा और आदर्शों का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि प्रभु के जन्म से अयोध्या में आनंद और उत्सव का वातावरण छा गया था तथा देवताओं ने भी उनके अवतरण का स्वागत किया था।

कथावाचक ने माता कौशल्या के वात्सल्य, गुरु वशिष्ठ के संरक्षण में प्राप्त शिक्षा तथा भाइयों के प्रति श्रीराम के प्रेम और सम्मान की चर्चा करते हुए कहा कि बाल्यकाल से ही उनमें अनुशासन, विनम्रता, करुणा और आज्ञाकारिता जैसे गुण विद्यमान थे। यही गुण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम बनाते हैं और आज के समाज के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं।कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों और संगीतमय रामकथा ने माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते नजर आए और पूरे आयोजन स्थल पर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता रहा।आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि श्रीराम कथा का मुख्य उद्देश्य समाज को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन से जोड़ना है। कथा के आगामी दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है।

