एमएनसीयू गेट पर नवजातों के इलाज मामले में पीएमओ ने लिया संज्ञान, जांच को पहुंची राज्य स्वास्थ्य समिति की टीम

डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में बिजली संकट के कारण एमएनसीयू वार्ड के गेट पर नवजात शिशुओं का इलाज किए जाने का मामला अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने तथा मीडिया में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने इस मामले का संज्ञान लिया है।

एमएनसीयू गेट पर नवजातों के इलाज मामले में पीएमओ ने लिया संज्ञान, जांच को पहुंची राज्य स्वास्थ्य समिति की टीम

__ वीडियो वायरल और मीडिया रिपोर्ट के बाद हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक कार्यकर्ता ने जांच दल को सौंपा लिखित आवेदन; तीन दिन से ठप बिजली आपूर्ति का लगाया आरोप

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में बिजली संकट के कारण एमएनसीयू वार्ड के गेट पर नवजात शिशुओं का इलाज किए जाने का मामला अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने तथा मीडिया में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने इस मामले का संज्ञान लिया है। पीएमओ के निर्देश पर राज्य स्वास्थ्य समिति की दो सदस्यीय जांच टीम मंगलवार को अस्पताल पहुंची और पूरे मामले की विस्तृत जांच की।जांच टीम ने अस्पताल के एमएनसीयू वार्ड, विद्युत आपूर्ति व्यवस्था, ट्रांसफार्मर, चेंजर तथा अन्य तकनीकी उपकरणों का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों से भी घटना के संबंध में जानकारी ली गई।

टीम ने उस स्थान का भी जायजा लिया जहां बिजली नहीं रहने के कारण नवजात शिशुओं का इलाज वार्ड के भीतर करने के बजाय एमएनसीयू गेट के पास किया गया था।जांच के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता हरेकृष्ण यादव भी अस्पताल पहुंचे और जांच दल के समक्ष अपना लिखित आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन में उन्होंने आरोप लगाया है कि अस्पताल में लगातार तीन दिनों तक बिजली आपूर्ति बाधित रही, जिसके कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि नवजात शिशुओं के लिए बने विशेष वार्ड में पर्याप्त बिजली व्यवस्था नहीं होने से गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई थी और चिकित्सकों को मजबूरी में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत इलाज करना पड़ा।हरेकृष्ण यादव ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि अस्पताल के ट्रांसफार्मर और चेंजर में तकनीकी खराबी की जानकारी पूर्व में संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी थी, लेकिन समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई।

उन्होंने मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।सूत्रों के अनुसार जांच टीम ने अस्पताल से संबंधित कई अभिलेखों की भी जांच की तथा विद्युत व्यवस्था से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां अपने साथ ली हैं। टीम ने अस्पताल प्रबंधन से यह भी पूछा कि तकनीकी खराबी की सूचना कब दी गई और उसके बाद सुधारात्मक कार्रवाई में देरी क्यों हुई।गौरतलब है कि सोमवार को बिजली संकट के बीच दो नवजात शिशुओं का इलाज एमएनसीयू वार्ड के गेट के समीप किया गया था। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया था। अब राज्य स्वास्थ्य समिति की जांच के बाद संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होने और आगे की कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।