रामलीला में गूंजा श्रीराम का पराक्रम, ताड़का-मारीच-सुबाहु का हुआ संहार
तुलसी आश्रम, रघुनाथपुर स्थित महाकालेश्वर मंदिर परिसर में चल रही रामलीला के चौथे दिन भगवान श्रीराम के अद्भुत पराक्रम का जीवंत मंचन हुआ। कलाकारों ने ताड़का वध के साथ मारीच और सुबाहु के संहार का प्रसंग प्रभावशाली संवाद, अभिनय और युद्ध दृश्यों के माध्यम से प्रस्तुत किया।


__ ऋषि-मुनियों के यज्ञ की रक्षा का प्रसंग देख भावविभोर हुए श्रद्धालु, जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजता रहा तुलसी आश्रम परिसर
केटी न्यूज/ब्रह्मपुर।
तुलसी आश्रम, रघुनाथपुर स्थित महाकालेश्वर मंदिर परिसर में चल रही रामलीला के चौथे दिन भगवान श्रीराम के अद्भुत पराक्रम का जीवंत मंचन हुआ। कलाकारों ने ताड़का वध के साथ मारीच और सुबाहु के संहार का प्रसंग प्रभावशाली संवाद, अभिनय और युद्ध दृश्यों के माध्यम से प्रस्तुत किया। मंचन के दौरान पूरा परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गूंजता रहा। श्रद्धालु देर रात तक रामलीला का आनंद लेते रहे।रामलीला के प्रसंग में दिखाया गया कि बक्सर क्षेत्र में तपस्या कर रहे महामुनि विश्वामित्र के यज्ञ में ताड़का, मारीच और सुबाहु समेत अन्य राक्षस बार-बार बाधा डालते थे। यज्ञ को नष्ट करने के लिए वे उत्पात मचाते थे, लेकिन यज्ञ की पूर्णाहुति में बाधा न आए, इसलिए विश्वामित्र क्रोध पर नियंत्रण रखते थे। इसी बीच उन्हें भगवान श्रीराम के अयोध्या में अवतरित होने की जानकारी मिलती है।

इसके बाद वे राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले आते हैं।रामलीला में इसके बाद ताड़का और श्रीराम के बीच हुए संघर्ष का मंचन किया गया। विशालकाय राक्षसी ताड़का का सामना करते हुए श्रीराम ने उसका वध कर दिया। ताड़का के वध की खबर मिलने के बाद मारीच और सुबाहु श्रीराम से युद्ध करने पहुंचते हैं। युद्ध के दौरान श्रीराम ने सुबाहु का संहार कर दिया, जबकि मारीच को बाण से दूर समुद्र की ओर भेज दिया। राक्षसों के आतंक से मुक्ति मिलने पर ऋषि-मुनियों ने भगवान श्रीराम की जय-जयकार की और यज्ञ निर्विघ्न संपन्न होने का मार्ग प्रशस्त हुआ।ताड़का वध और मारीच-सुबाहु युद्ध के दृश्यों पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं।

कलाकारों के संवाद और अभिनय ने धार्मिक प्रसंग को प्रभावी बना दिया। तुलसी विचार मंच के संयोजक शैलेश ओझा ने कहा कि तुलसी आश्रम की रामलीला धार्मिक आयोजन के साथ क्षेत्र की रामकथा परंपरा को जीवंत रखने का माध्यम है। ऐतिहासिक-आध्यात्मिक महत्व वाले इस स्थल पर रामलीला के जरिए भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी राजू मिश्रा ने बताया कि आगामी प्रसंग में श्रीराम जनकपुर की ओर प्रस्थान करेंगे। इसी दौरान चरण स्पर्श से पत्थर बनी माता अहिल्या का उद्धार करेंगे। अहिल्या उद्धार के प्रसंग को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता है।

