बिना कनेक्शन थमाया हजारों का बिल, अब बिजली कंपनी देगी 5 हजार का हर्जाना
बिना बिजली कनेक्शन के ही बकाया बिल थमाने और उपभोक्ता को वर्षों तक विभाग का चक्कर लगवाने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड की सेवा में त्रुटि मानते हुए नया मीटर लगाने, संपूर्ण बकाया समाप्त कर नियमानुसार नया बिजली बिल जारी करने तथा परिवादी को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी के एवज में पांच हजार रुपये एकमुश्त मुआवजा देने का आदेश दिया है।

__ उपभोक्ता आयोग ने बिजली विभाग की सेवा में मानी गंभीर त्रुटि, 45 दिनों में नया मीटर लगाने और बकाया खत्म कर सही विपत्र जारी करने का आदेश
केटी न्यूज/बक्सर।
बिना बिजली कनेक्शन के ही बकाया बिल थमाने और उपभोक्ता को वर्षों तक विभाग का चक्कर लगवाने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड की सेवा में त्रुटि मानते हुए नया मीटर लगाने, संपूर्ण बकाया समाप्त कर नियमानुसार नया बिजली बिल जारी करने तथा परिवादी को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी के एवज में पांच हजार रुपये एकमुश्त मुआवजा देने का आदेश दिया है। विभाग को 45 दिनों के भीतर आदेश का अनुपालन करना होगा।

__ कनेक्शन मिला नहीं, चढ़ गया बकाया
मामला परिवाद संख्या 24/2025 से जुड़ा है। परिवादी सोनू कुमार चौबे ने अपने पिता त्रिभुवन चौबे के नाम पर 12 फरवरी 2015 को बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। इसके लिए उसी दिन 475 रुपये भी जमा किए गए थे। विभाग ने एक माह के भीतर कनेक्शन देने का आश्वासन दिया, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हुई।कनेक्शन के लिए विभागीय कार्यालयों का चक्कर लगा रहे परिवादी को उस समय झटका लगा, जब एसडीओ से संपर्क करने पर बताया गया कि उनके नाम पर 2,087 रुपये बकाया हैं। जबकि परिवादी का कहना था कि उसे पहले कभी बिजली कनेक्शन मिला ही नहीं था। ऐसे में बकाया राशि की मांग ने पूरे मामले को विवाद में बदल दिया।

__लोक शिकायत के आदेश पर भी नहीं हुई कार्रवाई
परिवादी ने वर्ष 2024 में इस मामले को लेकर बक्सर के लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के यहां गुहार लगाई। वहां आदेश पारित होने के बावजूद अनुपालन नहीं होने पर उसने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।सुनवाई के दौरान विपक्षी विभाग ने मामले को त्रुटिपूर्ण बताते हुए परिवादी को किसी राहत का पात्र नहीं माना। हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने विभाग की सेवा में त्रुटि पाई और उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष वेद प्रकाश सिंह और सदस्य राजीव सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया। परिवादी की ओर से अधिवक्ता विष्णुदत्त द्विवेदी ने मामले की जानकारी दी।


