करूअज में जमीन विवाद पर आमने-सामने आए दो पक्ष, पुलिस-प्रशासन की तत्परता से टला बड़ा टकराव
कोरानसराय थाना क्षेत्र के करूअज गांव में गुरुवार की सुबह एक विवादित भूखंड को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण होती जा रही थी और किसी भी समय विवाद बड़े टकराव का रूप ले सकता था, लेकिन पुलिस-प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ से मामला शांतिपूर्ण ढंग से नियंत्रित कर लिया गया।

__ कब्रिस्तान और रैयती जमीन के दावे को लेकर बढ़ा तनाव, सीओ व थानाध्यक्ष ने मौके पर पहुंच बनाए रखी यथास्थिति
केटी न्यूज/डुमरांव
कोरानसराय थाना क्षेत्र के करूअज गांव में गुरुवार की सुबह एक विवादित भूखंड को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण होती जा रही थी और किसी भी समय विवाद बड़े टकराव का रूप ले सकता था, लेकिन पुलिस-प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ से मामला शांतिपूर्ण ढंग से नियंत्रित कर लिया गया। मौके पर पहुंचे कोरानसराय थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार और डुमरांव के प्रभारी अंचलाधिकारी (सीओ) कुमार दिनेश ने दोनों पक्षों को समझाकर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया, जिसके बाद संभावित विवाद टल गया।जानकारी के अनुसार गांव के मुख्य मार्ग के किनारे स्थित एक भूखंड को लेकर लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अनुसूचित जाति बस्ती के लोगों का दावा है कि उक्त भूमि का उपयोग दशकों से कब्रिस्तान के रूप में किया जाता रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार कोपवां गांव के एक रैयतदार परिवार ने वर्षों पूर्व स्वेच्छा से यह जमीन अनुसूचित जाति समुदाय को कब्रिस्तान के लिए उपलब्ध कराई थी, जिसके बाद से यहां अंतिम संस्कार से जुड़े धार्मिक कार्य होते रहे हैं।हालांकि हाल के दिनों में उसी परिवार द्वारा कथित रूप से उक्त जमीन का कुछ हिस्सा करूअज गांव के तीन लोगों को बेच दिए जाने के बाद विवाद गहरा गया। जमीन खरीदने वाले पक्ष का कहना है कि भूमि रैयती है और उन्हें विधिवत बेची गई है, जबकि दूसरा पक्ष इसे कब्रिस्तान की जमीन बताते हुए किसी भी प्रकार के निजी स्वामित्व को अस्वीकार कर रहा है।बताया जाता है कि कुछ दिन पहले खरीदार पक्ष द्वारा विवादित भूखंड पर मौजूद सूखे पेड़ों को काटने का प्रयास किया गया था। इस पर अनुसूचित जाति बस्ती के लोगों ने विरोध जताया और मामला वहीं से गरमाने लगा। गुरुवार को विवाद उस समय और बढ़ गया जब कब्रिस्तान होने का दावा करने वाले लोगों ने भूमि की घेराबंदी के लिए कंटीले तार लगाने शुरू कर दिए।

इसकी सूचना मिलते ही दूसरा पक्ष भी मौके पर पहुंच गया और घेराबंदी हटाने की मांग करने लगा।दोनों पक्षों के बीच बहस और नोकझोंक बढ़ने लगी थी। ग्रामीणों के अनुसार माहौल लगातार तनावपूर्ण हो रहा था और समय रहते हस्तक्षेप नहीं होता तो स्थिति हिंसक झड़प में भी बदल सकती थी। इसी बीच विवाद की सूचना मिलते ही कोरानसराय थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। बाद में प्रभारी सीओ कुमार दिनेश भी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों की बात विस्तार से सुनी।प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों पक्षों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि जब तक भूमि के स्वामित्व और उपयोग को लेकर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक कोई भी पक्ष विवादित जमीन पर किसी प्रकार का निर्माण, घेराबंदी या अन्य गतिविधि नहीं करेगा।

अधिकारियों ने यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश देते हुए शांति और सौहार्द कायम रखने की अपील की।मौके पर मौजूद प्रभारी सीओ कुमार दिनेश ने कहा कि संबंधित भूमि का वर्षों से कब्रिस्तान के रूप में उपयोग होता रहा है। ऐसे में वर्तमान स्थिति को देखते हुए इसका उपयोग कब्रिस्तान के रूप में ही माना जाएगा। वहीं थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार ने बताया कि जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच टकराव की सूचना मिली थी। पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराया।पुलिस-प्रशासन की इस तत्परता के बाद दोनों पक्ष अपने-अपने घर लौट गए। गांव में फिलहाल शांति बनी हुई है, लेकिन विवादित भूमि को लेकर प्रशासन की नजर बनी हुई है। ग्रामीणों ने भी अधिकारियों की सक्रियता की सराहना करते हुए कहा कि समय पर हस्तक्षेप नहीं होता तो गांव में बड़ा विवाद खड़ा हो सकता था।

