डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच : डीएम साहिला
साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से मंगलवार को जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर से एमपी उच्च विद्यालय, बक्सर में 'साइबर मंगलवार' जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी साहिला एवं पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य ने संयुक्त रूप से भाग लेकर विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया।


__ साइबर मंगलवार' कार्यक्रम में डीएम व एसपी ने विद्यार्थियों को किया जागरूक, 1930 हेल्पलाइन पर तत्काल शिकायत दर्ज कराने की दी सलाह
केटी न्यूज/बक्सर
साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से मंगलवार को जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर से एमपी उच्च विद्यालय, बक्सर में 'साइबर मंगलवार' जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी साहिला एवं पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य ने संयुक्त रूप से भाग लेकर विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। इस दौरान डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी साहिला ने कहा कि वर्तमान समय पूरी तरह डिजिटल होता जा रहा है। ऐसे में साइबर सुरक्षा केवल सरकारी एजेंसियों की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से सोशल मीडिया, इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सोच-समझकर उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी आर्थिक और सामाजिक क्षति का कारण बन सकती है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को तकनीक का उपयोग ज्ञान, शिक्षा और नवाचार के लिए करना चाहिए, न कि बिना सत्यापन के किसी भी ऑनलाइन गतिविधि में शामिल होना चाहिए।डीएम ने विद्यार्थियों को सचेत करते हुए कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाता, एटीएम कार्ड, यूपीआई पिन, ओटीपी, पासवर्ड अथवा अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं करें। यदि किसी प्रकार की ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक या साइबर अपराध का सामना करना पड़े तो बिना समय गंवाए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या नजदीकी पुलिस थाना से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि समय पर सूचना देने से साइबर ठगी की राशि वापस मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य ने साइबर अपराधों के बदलते स्वरूपों की विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि आजकल फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक, क्यूआर कोड स्कैम, सोशल मीडिया हैकिंग, डिजिटल अरेस्ट, निवेश के नाम पर ठगी और ऑनलाइन जॉब फ्रॉड जैसे मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक नहीं करने, मोबाइल में मजबूत पासवर्ड रखने, दो-स्तरीय सुरक्षा (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) का उपयोग करने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना पुलिस को देने की अपील की।कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के साथ संवाद भी स्थापित किया। विद्यार्थियों ने साइबर अपराधों से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे, जिनका जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने सरल एवं व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से समाधान किया।

साथ ही साइबर सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव साझा करते हुए सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम के अंत में सभी छात्र-छात्राओं ने साइबर सुरक्षा के प्रति स्वयं जागरूक रहने तथा अपने परिवार, मित्रों और समाज के अन्य लोगों को भी साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूक करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर जिला स्तरीय पदाधिकारी, विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। जिला प्रशासन ने इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों को आगे भी नियमित रूप से आयोजित करने की बात कही, ताकि साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

