चार माह की मजदूरी बकाया, मजदूरों ने किया चौसा थर्मल पॉवर प्लांट में काम ठप

चौसा में निर्माणाधीन 1320 मेगावाट थर्मल पावर परियोजना एक बार फिर मजदूर आंदोलन की वजह से सुर्खियों में है। चार माह से वेतन भुगतान नहीं होने से आक्रोशित मजदूरों ने सोमवार को शांतिपूर्ण तरीके से कार्य बहिष्कार कर दिया। मजदूरों का साफ कहना हैकृजब तक बकाया वेतन का भुगतान नहीं होगा, तब तक काम पर लौटने का सवाल ही नहीं उठता।

चार माह की मजदूरी बकाया, मजदूरों ने किया चौसा थर्मल पॉवर प्लांट में काम ठप

-- वेतन नहीं तो काम नहीं, 1320 मेगावाट परियोजना में मजदूरों का शांतिपूर्ण बहिष्कार, प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप

केटी न्यूज/बक्सर

चौसा में निर्माणाधीन 1320 मेगावाट थर्मल पावर परियोजना एक बार फिर मजदूर आंदोलन की वजह से सुर्खियों में है। चार माह से वेतन भुगतान नहीं होने से आक्रोशित मजदूरों ने सोमवार को शांतिपूर्ण तरीके से कार्य बहिष्कार कर दिया। मजदूरों का साफ कहना हैकृजब तक बकाया वेतन का भुगतान नहीं होगा, तब तक काम पर लौटने का सवाल ही नहीं उठता।परियोजना से जुड़ी एसटीपीएल की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी के अधीन कार्यरत ठेकेदार पावर मेक पर मजदूरों ने लगातार वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।मजदूरों के अनुसार, 25 दिसंबर को उन्हें आश्वासन दिया गया था कि 10 जनवरी तक हर हाल में बकाया वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा।

लेकिन तय समय सीमा बीत जाने के बावजूद उनके खातों में एक रुपया भी नहीं पहुंचा। इससे मजदूरों में गहरा असंतोष फैल गया और अंततः उन्होंने काम रोकने का निर्णय लिया।यह कार्य बहिष्कार पूरी तरह शांतिपूर्ण बताया जा रहा है। मजदूर किसी तरह की अव्यवस्था या टकराव से दूर रहते हुए अपने आवासीय कॉलोनियों में रहकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। हालांकि काम ठप होने से परियोजना की रफ्तार पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।इस आंदोलन को विद्युत मजदूर कांग्रेस (इंटक) का खुला समर्थन मिला है। संगठन के अध्यक्ष अमरनाथ पाण्डेय उर्फ पप्पु पाण्डेय ने कहा कि मजदूरों की मांग पूरी तरह जायज है।

चार-चार महीने तक वेतन नहीं मिलना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने प्रशासन से हस्तक्षेप कर मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और लंबित वेतन का तत्काल भुगतान कराने की मांग की।मजदूर नेता रामप्रवेश सिंह ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मजदूरों को न तो निर्धारित बोर्ड रेट के अनुसार भुगतान मिलता है और न ही मजदूरी समय पर दी जाती है।चार महीने से वेतन अटका होने के कारण मजदूरों के सामने रोजमर्रा के खर्च, किराया, इलाज और बच्चों की पढ़ाई तक का संकट खड़ा हो गया है। कई परिवार कर्ज के सहारे जीवन चलाने को मजबूर हैं।

गौरतलब है कि चौसा थर्मल पावर परियोजना की एक यूनिट (660 मेगावाट) का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि दूसरी यूनिट का निर्माण कार्य जारी है। पावर मेक के अधीन एक हजार से अधिक मजदूर इस परियोजना में कार्यरत हैं। ऐसे में मजदूरों का कार्य बहिष्कार न सिर्फ प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि राज्य की इस महत्वाकांक्षी ऊर्जा परियोजना की समय-सीमा पर भी संकट के संकेत दे रहा है।अब सवाल यह है कि प्रशासन और परियोजना प्रबंधन मजदूरों की पीड़ा को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर वेतन के बिना ही मजदूरों से विकास की उम्मीद की जाती है।