"बच्चों का मैदान नहीं बनने देंगे दफ्तर" : खेल के अधिकार पर अड़े ग्रामीण, पंचायत भवन के खिलाफ सड़क पर उतरा गांव
गायघाट पंचायत के भूमिहारी टोला में शनिवार को उस समय माहौल गरमा गया जब विद्यालय के खेल मैदान पर पंचायत सरकार भवन निर्माण की तैयारी के विरोध में सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि गांव के बच्चों के हिस्से की जमीन पर किसी भी कीमत पर सरकारी भवन नहीं बनने दिया जाएगा।

__ विद्यालय के एकमात्र खेल मैदान पर पंचायत सरकार भवन निर्माण का विरोध तेज, सैकड़ों ग्रामीणों का धरना; प्रशासन ने जांच का दिया भरोसा
केटी न्यूज/ब्रह्मपुर
गायघाट पंचायत के भूमिहारी टोला में शनिवार को उस समय माहौल गरमा गया जब विद्यालय के खेल मैदान पर पंचायत सरकार भवन निर्माण की तैयारी के विरोध में सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि गांव के बच्चों के हिस्से की जमीन पर किसी भी कीमत पर सरकारी भवन नहीं बनने दिया जाएगा। इसे लेकर ग्रामीणों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से धरना-प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ जोरदार नाराजगी जताई।मामला अनुसूचित जनजाति प्राथमिक विद्यालय एवं प्राथमिक विद्यालय गायघाट के संयुक्त खेल मैदान से जुड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बच्चों के लिए बची एकमात्र खुली जगह को भी सरकारी भवनों से भरने की कोशिश की जा रही है।

उनका कहना है कि विद्यालय परिसर में पहले से आंगनबाड़ी केंद्र, उपस्वास्थ्य केंद्र, मनरेगा भवन और पानी टंकी जैसी कई सरकारी संरचनाएं मौजूद हैं। ऐसे में खेल मैदान को भी निर्माण कार्य की भेंट चढ़ाना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने कहा कि सरकार एक ओर खेल और शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर गांवों में बच्चों के खेल मैदान ही खत्म किए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब पंचायत सरकार भवन के लिए अन्य सरकारी भूमि उपलब्ध हो सकती है तो फिर विद्यालय के मैदान को ही क्यों चुना गया?

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि ददन यादव, पूर्व मुखिया रामशीष यादव, सरपंच रामजी कुंवर सहित कई जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने और वैकल्पिक भूमि चिह्नित करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बच्चों के खेल मैदान को बचाने की मांग अनसुनी की गई तो आंदोलन और व्यापक किया जाएगा।धरने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया। ब्रह्मपुर अंचलाधिकारी खुशबू खातून ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की बात कही, जबकि डुमरांव एसडीओ राकेश कुमार ने कहा कि सभी पक्षों से बातचीत कर नियमों के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा।फिलहाल गांव में एक ही सवाल गूंज रहा है—बच्चों का मैदान बचेगा या उस पर सरकारी दफ्तर खड़ा होगा।

