काम पूरा, पैसा गायब: डेढ़ साल से भुगतान के इंतजार में ठेकेदार, विभाग तक पहुंची गुहार
डुमरांव नगर परिषद में विकास कार्यों के भुगतान को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। नगर परिषद द्वारा कराए गए दो जर्मन हेंगर अस्थायी आश्रय स्थल निर्माण का काम पूरा हुए डेढ़ साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन संवेदक को अब तक एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया गया है। परेशान ठेकेदार ने अब नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव से हस्तक्षेप की मांग की है।
__ डुमरांव नगर परिषद पर गंभीर आरोप, बैंक ऋण लेकर कराया था जर्मन हेंगर निर्माण, अब कर्ज और ईएमआई का बढ़ा बोझ
केटी न्यूज/डुमरांव
डुमरांव नगर परिषद में विकास कार्यों के भुगतान को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। नगर परिषद द्वारा कराए गए दो जर्मन हेंगर अस्थायी आश्रय स्थल निर्माण का काम पूरा हुए डेढ़ साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन संवेदक को अब तक एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया गया है। परेशान ठेकेदार ने अब नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव से हस्तक्षेप की मांग की है।मामला नगर परिषद डुमरांव की निविदा संख्या 1/2024-25 से जुड़ा है, जो 12 जून 2024 को प्रकाशित की गई थी। इस निविदा के तहत ग्रुप संख्या-01 और 02 में दो जर्मन हेंगर अस्थायी आश्रय स्थल बनाए जाने थे। तुलसीपुर निवासी संवेदक अशोक कुमार सिंह ने सबसे कम दर पर निविदा हासिल की, जिसके बाद उन्हें कार्य आवंटित किया गया।

संवेदक के अनुसार, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी के साथ 5 सितंबर 2024 को विधिवत एकरारनामा हुआ और पत्रांक 1950 एवं 1951 के तहत कार्यादेश जारी किया गया। आदेश मिलने के बाद निर्धारित दोनों स्थलों पर निर्माण कार्य तेजी से शुरू कराया गया और 9 दिसंबर 2024 तक पूरा कर दिया गया।आरोप है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी नगर परिषद ने अब तक भुगतान नहीं किया। जबकि कार्य पूर्ण हुए करीब 19 माह गुजर चुके हैं। भुगतान के इंतजार में संवेदक आर्थिक संकट से जूझ रहा है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य बैंक से ऋण लेकर कराया गया था और अब ईएमआई चुकाने के लिए उन्हें दूसरे स्रोतों से कर्ज लेना पड़ रहा है। इससे परिवार पर भी आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

संवेदक ने बताया कि भुगतान के लिए उन्होंने 10 अप्रैल, 26 अप्रैल और 2 जून 2025 को कार्यपालक पदाधिकारी को लिखित आवेदन दिया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं मिलने पर अब उन्होंने विभाग के प्रधान सचिव को आवेदन भेजकर जल्द भुगतान कराने की मांग की है।इस मामले ने नगर परिषद की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो यह मामला और तूल पकड़ सकता है। अब सबकी नजर विभागीय कार्रवाई पर टिकी है।

