मांगलिक गीतों और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा जंगलीनाथ शिवमंदिर, 11 जोड़ों ने थामे एक-दूजे के हाथ

रजनी कांत दूबे/डुमरांव डुमरांव का जंगलीनाथ शिवमंदिर सोमवार को मांगलिक गीतों, शहनाई की धुन और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। मंदिर परिसर में आयोजित भव्य निःशुल्क सामूहिक विवाह समारोह में 11 जोड़े पूरे वैदिक विधि-विधान के साथ सात फेरे लेकर वैवाहिक बंधन में बंध गए। इस दौरान पूरा परिसर उत्सव के रंग में रंगा नजर आया और श्रद्धालुओं व परिजनों की भीड़ से मंदिर परिसर खचाखच भरा रहा।

मांगलिक गीतों और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा जंगलीनाथ शिवमंदिर, 11 जोड़ों ने थामे एक-दूजे के हाथ
मांगलिक गीतों और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा जंगलीनाथ शिवमंदिर, 11 जोड़ों ने थामे एक-दूजे के हाथ

सामूहिक विवाह का यह आयोजन रूद्र सागर सेवा संस्थान की ओर से किया गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों का सम्मानपूर्वक विवाह कराना और समाज में व्याप्त दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश देना था। सुबह से शुरू हुआ यह आयोजन देर शाम तक चलता रहा, जिसमें विवाह की सभी रस्में पारंपरिक तरीके से संपन्न कराई गईं।

विवाह समारोह के दौरान आचार्य मंडल के नेतृत्व में विद्वान ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूरे विधि-विधान से वर-वधुओं का विवाह कराया। आचार्य मंडल का नेतृत्व पंडित विन्ध्याचल ओझा कर रहे थे। उनके निर्देशन में सभी जोड़ों ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए और वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत की।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं द्वारा गाए जा रहे पारंपरिक मांगलिक गीत वातावरण को और भी पवित्र और भावनात्मक बना रहे थे। मंदिर परिसर में गूंजते गीतों और मंत्रों के बीच वर-वधू के परिजनों के चेहरे पर खुशी और संतोष साफ झलक रहा था।

-- सांस्कृतिक कार्यक्रम बना आकर्षण का केंद्र

सामूहिक विवाह समारोह को और भी यादगार बनाने के लिए आयोजन समिति की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में कलाकारों ने शिव विवाह, राधा-कृष्ण की झांकी और धार्मिक नृत्य प्रस्तुत किए, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह में मनोरंजन का रंग भी घोल दिया और लोगों ने तालियों की गूंज के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

समारोह के दौरान संस्थान की ओर से नवविवाहित जोड़ों को आभूषण, फर्नीचर तथा दैनिक उपयोग की कई जरूरी वस्तुएं उपहार स्वरूप प्रदान की गईं। इसके अलावा विवाह में शामिल बारातियों, घरातियों तथा रिश्तेदारों के लिए मुफ्त जलपान और सामूहिक भोज की भी व्यवस्था की गई थी। दिन भर लोगों के लिए भोजन और जलपान की व्यवस्था होने से मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल बना रहा।

-- गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति

इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि डुमरांव एसडीएम राकेश कुमार उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में बीडीओ संदीप कुमार पांडेय, थानाध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा, भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश भुवन, प्रवक्ता शक्ति राय, युवा मोर्चा के प्रांतीय नेता दीपक यादव, सामाजिक कार्यकर्ता रामबहादूर सिंह, राजीव रंजन सिंह उर्फ रवि सिंह, उपेन्द्र चौबे और पुष्पांजलि देवी सहित सैकड़ों गणमान्य लोग समारोह में शामिल हुए और नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया।

-- इन जोड़ो ने लिए सात फेरे

सामूहिक विवाह में जिन जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ उनमें रवि-रंजू, अक्षय लाल-फूल कुमारी, अमृत-सरिता, दीपू-नंदनी, जयराम-किरण, अवधेश-महिमा, मंटू-सुशीला और सत्या-सपना सहित कुल 11 जोड़े शामिल रहे। सभी जोड़ों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ जयमाल और सात फेरों की रस्म पूरी की।

-- समिति और आचार्य मंडल की रही महत्वपूर्ण भूमिका

इस आयोजन को सफल बनाने में रूद्र सागर सेवा संस्थान के संरक्षक तथा गुजरात के पूर्व डीजीपी केके ओझा, संस्थान के अध्यक्ष बालकृष्ण चौबे, सचिव रविशंकर चौबे, व्यवस्थापक संजय चौबे उर्फ डब्लू चौबे, राजेश सैनी, रिंटू चौबे, गजेन्द्र दूबे, शिबू दूबे, सुशील चौबे, तेजनारायण ओझा, रविशंकर पाठक,  सोनू ओझा, सोनू सिंह, मोनू तिवारी, अविनाश मिश्र, गोविंद तिवारी सहित कई सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन की तैयारी कई दिनों से चल रही थी और स्वयंसेवकों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम को सफल बनाया।

संस्थान के सचिव रविशंकर चौबे ने बताया कि आने वाले वर्षों में इस सामूहिक विवाह समारोह को और भी बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का विवाह कराया जा सके। वहीं, उन्होंने घोषणा की कि अगले साल 21 जोड़ो का निःशुल्क शादी कराया जाएगा।

वहीं संस्थान के संरक्षक सह पूर्व डीजीपी केके ओझा ने कहा कि समाज में फैली दहेज प्रथा एक गंभीर सामाजिक समस्या है और इसे समाप्त करने के लिए सामूहिक विवाह जैसे आयोजन महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि दहेज रूपी दानव को समाज से खत्म करने के लिए सभी को आगे आना होगा।

-- सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहा है संस्थान

गौरतलब है कि रूद्र सागर सेवा संस्थान इससे पहले भी कई सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहा है। संस्थान द्वारा सामूहिक उपनयन संस्कार, सामूहिक रूद्राभिषेक और गर्मी के दिनों में राहगीरों की प्यास बुझाने के लिए मुफ्त पनशाला चलाने जैसे कार्य किए जाते रहे हैं।

इस बार संस्थान ने एक नई पहल करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के लिए निःशुल्क सामूहिक विवाह का आयोजन किया, जिसमें 11 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया।

कार्यक्रम के अंत में सामूहिक भोज के बाद नवविवाहित जोड़ों को उपहार देकर विदा किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने इस सामाजिक पहल की जमकर सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बताया।