सरकारी पैसे से बना सामुदायिक भवन बना ‘निजी दरबार’
सिमरी प्रखंड के बड़का राजपुर पंचायत स्थित दादा बाबा के डेरा (मदिल के डेरा) का सार्वजनिक सामुदायिक भवन अब ग्रामीणों के लिए नहीं, बल्कि कथित तौर पर एक प्रभावशाली व्यक्ति के “निजी दरबार” में तब्दील हो गया है। इस गंभीर आरोप ने पंचायत स्तर पर सरकारी संपत्तियों के संरक्षण और उनके उपयोग पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।


__ डीएम से शिकायत, आरटीआई दस्तावेजों के आधार पर कब्जा और सरकारी फंड के दुरुपयोग की जांच की मांग
केटी न्यूज/बक्सर।
सिमरी प्रखंड के बड़का राजपुर पंचायत स्थित दादा बाबा के डेरा (मदिल के डेरा) का सार्वजनिक सामुदायिक भवन अब ग्रामीणों के लिए नहीं, बल्कि कथित तौर पर एक प्रभावशाली व्यक्ति के “निजी दरबार” में तब्दील हो गया है। इस गंभीर आरोप ने पंचायत स्तर पर सरकारी संपत्तियों के संरक्षण और उनके उपयोग पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।स्थानीय निवासी सत्यानंद मिश्रा ने मंगलवार को जिला पदाधिकारी को आवेदन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिस भवन का निर्माण आम जनता, सामाजिक कार्यक्रमों और सामुदायिक गतिविधियों के लिए सरकारी राशि से कराया गया था, उस पर अवैध रूप से निजी कब्जा कर लिया गया है।

इससे ग्रामीणों को भवन के उपयोग से वंचित होना पड़ रहा है।आवेदन में दावा किया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त अभिलेखों से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि भवन का ग्राउंड फ्लोर जिला परिषद मद से जबकि ऊपरी मंजिल बिहार विधान परिषद मद से निर्मित हुई थी। इतना ही नहीं, भवन की घेराबंदी भी सरकारी राशि से कराकर उसे कथित तौर पर निजी परिसर का हिस्सा बना दिया गया।शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि भवन में एयर कंडीशनर लगाकर उसका पारिवारिक उपयोग किया जा रहा है, जबकि सरकारी संपत्ति का उपयोग सार्वजनिक हित में होना चाहिए। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर जांच प्रभावित किए जाने की आशंका भी जताई गई है।

ग्रामीणों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी फंड से बने सामुदायिक भवनों पर इसी तरह प्रभावशाली लोगों का कब्जा होता रहा, तो पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा।सत्यानंद मिश्रा ने डीएम से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सामुदायिक भवन को अतिक्रमणमुक्त कराया जाए। साथ ही सरकारी राशि, पद या प्रभाव के दुरुपयोग की पुष्टि होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

