रंग, राग और परंपरा का संगम: ब्रह्मपुर महोत्सव 2026 ने बांधा समां

कला, संस्कृति और युवा ऊर्जा का अद्भुत संगम शनिवार को ब्रह्मपुर की धरती पर देखने को मिला, जब कला संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार तथा जिला प्रशासन बक्सर के संयुक्त तत्वावधान में बी एन प्लस टू उच्च विद्यालय, ब्रह्मपुर के प्रांगण में ‘ब्रह्मपुर महोत्सव 2026’ का भव्य आयोजन किया गया। अपराह्न तीन बजे से शुरू हुआ यह महोत्सव देर शाम तक रंगारंग प्रस्तुतियों और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।

रंग, राग और परंपरा का संगम: ब्रह्मपुर महोत्सव 2026 ने बांधा समां

-- दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुआ सांस्कृतिक उत्सव, कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

केटी न्यूज/ब्रह्मपुर

कला, संस्कृति और युवा ऊर्जा का अद्भुत संगम शनिवार को ब्रह्मपुर की धरती पर देखने को मिला, जब कला संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार तथा जिला प्रशासन बक्सर के संयुक्त तत्वावधान में बी एन प्लस टू उच्च विद्यालय, ब्रह्मपुर के प्रांगण में ‘ब्रह्मपुर महोत्सव 2026’ का भव्य आयोजन किया गया। अपराह्न तीन बजे से शुरू हुआ यह महोत्सव देर शाम तक रंगारंग प्रस्तुतियों और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।

-- दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी साहिला, अपर समाहर्ता बक्सर, अपर समाहर्त्ता सह जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी बक्सर, अनुमंडल पदाधिकारी डुमरांव राकेश कुमार एवं जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। दीप की ज्योति के साथ ही पूरे परिसर में उत्सव की आभा फैल गई और उपस्थित जनसमूह ने तालियों के साथ अतिथियों का स्वागत किया।मंच को पारंपरिक सजावट, रंगोली और आकर्षक पृष्ठभूमि से सजाया गया था, जो बिहार की लोकसंस्कृति की झलक प्रस्तुत कर रहा था। विद्यालय परिसर में स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और सांस्कृतिक प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी रही।

-- संस्कृति से जुड़ाव ही हमारी पहचान - जिलाधिकारी

अपने प्रेरक संबोधन में जिलाधिकारी साहिला ने कहा कि ब्रह्मपुर महोत्सव का उद्देश्य लोगों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और बिहार की समृद्ध परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में कहीं न कहीं हमारी लोक परंपराएं पीछे छूटती जा रही हैं, ऐसे में इस तरह के आयोजन समाज को अपनी विरासत का स्मरण कराते हैं।उन्होंने आगे कहा कि संस्कृति केवल नृत्य और संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी जीवन शैली, भाषा, रीति-रिवाज और सामूहिक चेतना का प्रतीक है। ऐसे महोत्सव सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं और समाज में आपसी सौहार्द को बढ़ावा देते हैं।

-- कलाकारों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

महोत्सव की शुरुआत पारंपरिक मंगलाचरण से हुई, जिसके बाद एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां मंच पर देखने को मिलीं। लोकगीतों की मधुर धुनों ने जहां श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया, वहीं लोकनृत्य की रंग-बिरंगी झलकियों ने माहौल को जीवंत बना दिया।स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ आमंत्रित सांस्कृतिक दलों ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। भोजपुरी लोकगीत, झूमर और पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। कई बार तो पूरा पंडाल तालियों की गूंज से थर्रा उठा।विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी देशभक्ति गीत, समूह नृत्य और नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनके उत्साह और आत्मविश्वास ने दर्शकों का दिल जीत लिया। अभिभावक अपने बच्चों की प्रस्तुति को मोबाइल में कैद करते नजर आए।

-- युवाओं में दिखा खास उत्साह

महोत्सव में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। स्वयंसेवकों ने व्यवस्था संभालने से लेकर अतिथियों के स्वागत तक हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। युवाओं की ऊर्जा और सहभागिता ने कार्यक्रम को और भी सफल बना दिया।कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा और स्वच्छता की भी समुचित व्यवस्था की गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी से आयोजन अनुशासित और सुव्यवस्थित रहा।

-- सांस्कृतिक विरासत को संजोने की पहल

ब्रह्मपुर महोत्सव 2026 केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह सांस्कृतिक जागरूकता का सशक्त मंच भी साबित हुआ। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने और परंपराओं को जीवित रखने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।ग्रामीण और शहरी संस्कृति के संगम ने इस महोत्सव को खास बना दिया। बुजुर्गों के चेहरे पर जहां अपनी परंपराओं को जीवित देख संतोष झलक रहा था, वहीं युवा पीढ़ी उत्साह के साथ उसे आत्मसात करती नजर आई।

-- यादगार बन गया ब्रह्मपुर का शनिवार

देर शाम जब कार्यक्रम अपने अंतिम चरण में पहुंचा तो पूरा परिसर उत्साह और उमंग से सराबोर था। दर्शकों ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के महोत्सव क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।ब्रह्मपुर महोत्सव 2026 ने यह साबित कर दिया कि यदि प्रशासन और समाज मिलकर पहल करें तो सांस्कृतिक धरोहर को न केवल सहेजा जा सकता है, बल्कि उसे नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया जा सकता है।ब्रह्मपुर की धरती पर सजे इस सांस्कृतिक उत्सव ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि अपनी जड़ों से जुड़कर ही समाज सशक्त और समृद्ध बन सकता है।