एमडीजे के वार्षिकोत्सव में संस्कृति और प्रतिभा का भव्य संगम

सोनवर्षा स्थित एमडीजे पब्लिक स्कूल के 17वें स्थापना दिवस एवं एमडीजे गर्ल्स हाईस्कूल के प्रथम वर्षगांठ का आयोजन रविवार को उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। विद्यालय परिसर में आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।

एमडीजे के वार्षिकोत्सव में संस्कृति और प्रतिभा का भव्य संगम

--मत्री ने कहा अंग्रेजी के साथ हिंदी एवं क्षेत्रीय भाषाओं का भी समुचित ज्ञान बच्चों को दे, ताकि मातृभाषा और संस्कृति से जुड़े रहें बच्चें 

--जहां माता-पिता थे भगवान, वहीं क्यों बन रहे हैं वृद्धाश्रम

केटी न्यूज। नावानगर

सोनवर्षा स्थित एमडीजे पब्लिक स्कूल के 17वें स्थापना दिवस एवं एमडीजे गर्ल्स हाईस्कूल के प्रथम वर्षगांठ का आयोजन रविवार को उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। विद्यालय परिसर में आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार सरकार के श्रम संसाधन मंत्री संजय सिंह ‘टाइगर’, लोक अभियोजक रामप्रताप सिंह, रिटायर्ड कर्नल रामप्रताप सिंह एवं रामदीनेश यादव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

अतिथियों का स्वागत विद्यालय के निदेशक डॉ. नंद कुमार सिंह ने अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया।सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना और सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद स्वागत गीत, राधा-कृष्ण नृत्य, ‘मेरे ढोलना सुन’, ‘आई लव माय इंडिया’, महाभारत मिक्स, ऑपरेशन सिंदूर मिक्स सॉन्ग तथा होली गीत ‘अचरा के धार’ जैसे प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। छात्रों द्वारा प्रस्तुत बिहार बजट पर आधारित अंग्रेजी नाटक विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसने सामाजिक और शैक्षणिक संदेश भी दिया।

अपने संबोधन में मंत्री संजय सिंह ने कहा कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर एमडीजे पब्लिक स्कूल ने एक मिसाल कायम की है। उन्होंने निजी विद्यालयों से अपील की कि अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी एवं क्षेत्रीय भाषाओं का भी समुचित ज्ञान बच्चों को दिया जाए, ताकि वे अपनी मातृभाषा और संस्कृति से जुड़े रहें। उन्होंने शिक्षा के व्यवसायीकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास भी होना चाहिए।

उन्होंने कहा जिस देश में श्रवण कुमार जैसे पुत्र ने अपने अंधे माता-पिता को कंधे पर बैठाकर तीर्थ यात्रा कराई, उसी देश में आज माता-पिता वृद्धाश्रम का सहारा लेने को मजबूर हो रहे हैं। यह बदलते सामाजिक मूल्यों और हमारी शिक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।मंच संचालन वरीय शिक्षक मुना कुमार एवं रेखा यादव ने किया। देर शाम तक चले कार्यक्रम में अभिभावकों और गणमान्य लोगों की भारी उपस्थिति रही। छात्रों की जीवंत प्रस्तुतियों से विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा और वार्षिकोत्सव यादगार बन गया।