खेती से शुरू हुआ सफर, अब हर माह 45 हजार की कमाई

बक्सर सदर प्रखंड के जगदीशपुर गांव की रहने वाली इंद्रावती देवी की कहानी ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की मिसाल बन गई है। कभी परिवार की आय का मुख्य सहारा खेती थी, लेकिन सीमित आमदनी के कारण घर की जरूरतें पूरी करना चुनौतीपूर्ण था।

खेती से शुरू हुआ सफर, अब हर माह 45 हजार की कमाई

__ जीविका से मिला आर्थिक संबल तो पशुपालन, आटा चक्की और तेल मशीन से खड़ा किया अपना कारोबार; दो लोगों को भी दिया रोजगार

केटी न्यूज/बक्सर।

बक्सर सदर प्रखंड के जगदीशपुर गांव की रहने वाली इंद्रावती देवी की कहानी ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की मिसाल बन गई है। कभी परिवार की आय का मुख्य सहारा खेती थी, लेकिन सीमित आमदनी के कारण घर की जरूरतें पूरी करना चुनौतीपूर्ण था। जीविका से जुड़ने के बाद मिले प्रशिक्षण, समूह आधारित वित्तीय सहयोग और बैंक ऋण ने इंद्रावती देवी को खेती से आगे बढ़कर उद्यमिता की राह दिखाई। आज वह विभिन्न आजीविका गतिविधियों से हर माह करीब 45 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।इंद्रावती देवी के परिवार में पति, एक पुत्र और एक पुत्री समेत कुल चार सदस्य हैं। जीविका से जुड़ने से पहले परिवार की आर्थिक स्थिति खेती पर निर्भर थी।

अतिरिक्त और स्थायी आय का कोई साधन नहीं था। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत और वित्तीय गतिविधियों को समझा तथा समूह के माध्यम से बैंक ऋण प्राप्त कर अपनी आजीविका को विस्तार देना शुरू किया।सबसे पहले उन्हें 30 हजार रुपये का बैंक ऋण मिला। इस राशि से उन्होंने एक भैंस खरीदी। दूध की बिक्री से उन्हें नियमित अतिरिक्त आमदनी होने लगी। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया और उन्होंने समय पर ऋण का भुगतान कर दिया। इसके बाद उन्होंने 80 हजार रुपये का ऋण लेकर अपनी आजीविका गतिविधियों को और मजबूत किया।

लगातार मेहनत और बेहतर प्रबंधन के बल पर इंद्रावती ने आगे बढ़ने का सिलसिला जारी रखा। लखपति योजना के तहत उन्हें बैंक से 1.50 लाख रुपये का ऋण मिला। इस राशि से उन्होंने तेल निकालने की मशीन और आटा चक्की की व्यवस्था की। योजना के माध्यम से मिले सहयोग से सिलाई मशीन भी खरीदी।आज इंद्रावती देवी की विभिन्न गतिविधियां न सिर्फ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बदल रही हैं, बल्कि दो अन्य लोगों को भी रोजगार मिला है। उनकी सफलता बताती है कि सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और मेहनत मिले तो ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकती हैं।