टीबी उन्मूलन को प्रशासन सख्त, हर संदिग्ध मरीज की होगी पहचान और अनिवार्य जांच
जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में प्रशासन ने अभियान की रफ्तार तेज करने का निर्णय लिया है। टीबी के संभावित मरीजों की समय पर पहचान, जांच और उपचार सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रत्येक मरीज का निक्षय पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण कराने पर विशेष जोर दिया गया है।

__ समीक्षा बैठक में प्रभारी जिलाधिकारी निहारिका छवि ने दिए निर्देश, निक्षय पोर्टल पर शत-प्रतिशत पंजीकरण और जनजागरूकता अभियान पर जोर
केटी न्यूज/बक्सर।
जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में प्रशासन ने अभियान की रफ्तार तेज करने का निर्णय लिया है। टीबी के संभावित मरीजों की समय पर पहचान, जांच और उपचार सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रत्येक मरीज का निक्षय पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण कराने पर विशेष जोर दिया गया है। इस संबंध में शनिवार को समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में प्रभारी जिलाधिकारी निहारिका छवि की अध्यक्षता में टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक आयोजित हुई, जिसमें अभियान की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।बैठक के दौरान प्रभारी जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से संभव नहीं है।

इसके लिए विभिन्न विभागों, जनप्रतिनिधियों, स्वास्थ्य कर्मियों और समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देकर ही जिले को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि संभावित मरीजों की पहचान के लिए घर-घर सर्वे अभियान चलाया जाए। ऐसे लोगों की प्राथमिकता के आधार पर जांच कराई जाए, जिनमें टीबी के लक्षण दिखाई दे रहे हों। साथ ही टीबी मरीजों के संपर्क में रहने वाले परिवार के सदस्यों एवं अन्य निकट संपर्कों की अनिवार्य जांच कर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि संक्रमण के प्रसार पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। निजी अस्पतालों और चिकित्सकों के यहां मिलने वाले टीबी मरीजों का भी समय पर निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए, जिससे सभी मरीजों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके और उनके उपचार की नियमित निगरानी की जा सके।प्रभारी जिलाधिकारी ने कहा कि उपचार के दौरान किसी भी मरीज का फॉलो-अप प्रभावित नहीं होना चाहिए। मरीजों को समय पर दवाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा उपचार पूरा होने तक उनकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि इलाज के बीच में दवा छोड़ने वाले मरीजों पर विशेष नजर रखी जाए और उन्हें दोबारा उपचार से जोड़ा जाए।

बैठक में जनजागरूकता को अभियान की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए प्रत्येक प्रखंड में व्यापक प्रचार-प्रसार कार्यक्रम चलाने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव, समय पर जांच और पूर्ण उपचार के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियां दूर हों और मरीज बिना किसी संकोच के उपचार के लिए आगे आएं।समीक्षा के दौरान प्रभारी जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अभियान से जुड़े लक्ष्यों की शत-प्रतिशत प्राप्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अभियान की नियमित समीक्षा की जाएगी और तय लक्ष्यों में किसी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य है कि जिले में टीबी नियंत्रण कार्यक्रम को अधिक प्रभावी बनाकर टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाया जाए।

