अनुमंडल अस्पताल में उपद्रव व तोड़फोड़ मामले में 10-15 अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज

डुमरांव अनुमंडल अस्पताल में हुई उग्र तोड़फोड़ की घटना को लेकर अस्पताल प्रबंधक अफरोज आलम के बयान पर 10-15 अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ डुमरांव थाने में एफआईआर दर्ज कराया गया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने सख्त रुख अपना लिया है। अस्पताल परिसर में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले इस कांड में अब तक आधा दर्जन से अधिक उपद्रवियों की पहचान कर ली गई है। वायरल वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है

अनुमंडल अस्पताल में उपद्रव व तोड़फोड़ मामले में 10-15 अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज

-- प्रबंधक के बयान पर दर्ज कराया गया है एफआईआर, वायरल वीडियो के आधार पर तोड़फोड़ कांड में आधा दर्जन उपद्रवी चिन्हित, गिरफ्तारी की उलटी गिनती शुरू

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव अनुमंडल अस्पताल में हुई उग्र तोड़फोड़ की घटना को लेकर अस्पताल प्रबंधक अफरोज आलम के बयान पर 10-15 अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ डुमरांव थाने में एफआईआर दर्ज कराया गया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने सख्त रुख अपना लिया है। अस्पताल परिसर में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले इस कांड में अब तक आधा दर्जन से अधिक उपद्रवियों की पहचान कर ली गई है। वायरल वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।

पुलिस ने साफ कर दिया है कि यह केवल तोड़फोड़ का मामला नहीं, बल्कि सरकारी कार्य में बाधा और स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा हमला है, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

-- क्या है पूरा मामला

बता दें कि शुक्रवार की शाम करीब चार बजे सड़क दुर्घटना में घायल करण दुबे और भोला दुबे को इलाज के लिए डुमरांव अनुमंडल अस्पताल लाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद करण दुबे की हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया। लेकिन उसी वक्त अस्पताल की सभी एंबुलेंस अन्य मरीजों की सेवा में व्यस्त थीं, जिस कारण एंबुलेंस मिलने में कुछ देरी हो गई।

इसी देरी को लेकर घायल के परिजन और ग्रामीण भड़क उठे। देखते ही देखते 10-15 लोगों की भीड़ अस्पताल परिसर में इकट्ठा हो गई और आक्रोश हिंसा में बदल गया। आरोप है कि उपद्रवियों ने अस्पताल के तीन गेट तोड़ दिए, स्ट्रेचर क्षतिग्रस्त कर दिया और सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया।

-- डॉक्टरों और कर्मियों पर हमला करने की कोशिश

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, उग्र भीड़ ने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को मारपीट के इरादे से ढूंढना शुरू कर दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि कई डॉक्टर और कर्मी अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर छिप गए। प्रभारी डीएस को भी एसडीएम कक्ष में शरण लेनी पड़ी।

ड्यूटी पर तैनात बिहार होमगार्ड के जवान के साथ बदसलूकी की गई, कॉलर पकड़कर धक्का दिया गया। वायरल वीडियो में उपद्रवी न सिर्फ अस्पताल को फूंकने की धमकी देते नजर आ रहे हैं, बल्कि डॉक्टरों का नाम लेकर उन्हें डराने की कोशिश भी की गई।

-- पुलिस की कार्रवाई तेज

डुमरांव थाना पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त संपत्तियों का आकलन किया है। प्राथमिकी में सरकारी कार्य में बाधा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, ड्यूटी पर तैनात जवान से बदसलूकी जैसी गंभीर धाराएं जोड़ी गई हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, चिन्हित उपद्रवियों के अलावा अन्य आरोपियों की पहचान के लिए टावर डंपिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

-- दुर्घटना की पृष्ठभूमि

बताया जा रहा है कि बड़का ढकाईच गांव निवासी करण दुबे अपने साथियों के साथ बाइक से लौट रहे थे। चौकियां गांव के पास एक ट्रक की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद घायलों को तुरंत अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया, जहां से करण दुबे को रेफर किया गया था।

-- डॉक्टरों में डर, आंदोलन की चेतावनी

घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों में भय का माहौल है। उनका कहना है कि यदि अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था नहीं बढ़ाई गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। डॉक्टरों का तर्क है कि सीमित संसाधनों और भारी दबाव के बावजूद वे लगातार मरीजों की सेवा कर रहे हैं, ऐसे में उनके साथ हिंसा बेहद चिंताजनक है।

-- प्रशासन का संदेश साफ

पुलिस प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि अस्पताल की सुरक्षा तत्काल बढ़ाई जाएगी और दोषियों को जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि आपात स्थिति में संयम बरतें और कानून को हाथ में न लें। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है, सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।