ठोरा नदी में मिला शव बना रहस्य, डीएनए और काली जींस के सहारे पहचान की तलाश
मुफस्सिल थाना क्षेत्र के जरिगावां और चक्रहंसी गांव के बीच ठोरा नदी किनारे मिला अज्ञात युवक का शव दूसरे दिन भी पुलिस के लिए पहेली बना हुआ है। शव की शिनाख्त नहीं होने से मामले का रहस्य और गहराता जा रहा है। पुलिस अब मृतक के डीएनए नमूने और उसके शरीर पर मिले कपड़ों के आधार पर पहचान की कड़ी जोड़ने में जुटी है।

केटी न्यूज/चौसा
मुफस्सिल थाना क्षेत्र के जरिगावां और चक्रहंसी गांव के बीच ठोरा नदी किनारे मिला अज्ञात युवक का शव दूसरे दिन भी पुलिस के लिए पहेली बना हुआ है। शव की शिनाख्त नहीं होने से मामले का रहस्य और गहराता जा रहा है। पुलिस अब मृतक के डीएनए नमूने और उसके शरीर पर मिले कपड़ों के आधार पर पहचान की कड़ी जोड़ने में जुटी है।सोमवार की शाम ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने नदी किनारे से एक युवक का शव बरामद किया था। कई दिनों तक पानी में पड़े रहने के कारण शव बुरी तरह सड़-गल चुका था। हालत इतनी खराब थी कि चेहरे समेत शरीर के कई हिस्सों की पहचान करना संभव नहीं रह गया। जंगली जानवरों द्वारा शव को नोचे जाने से स्थिति और भयावह हो गई थी।

प्रारंभिक जांच में मृतक की उम्र लगभग 35 वर्ष आंकी गई है। उसके शरीर पर पहनी गई काले रंग की जींस को पुलिस ने महत्वपूर्ण साक्ष्य मानते हुए सुरक्षित रखा है। चूंकि शारीरिक पहचान के अधिकांश आधार समाप्त हो चुके हैं, इसलिए अब कपड़ों और वैज्ञानिक जांच पर ही पुलिस की उम्मीद टिकी हुई है।मुफस्सिल थाना के अपर थानाध्यक्ष चंदन कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान मृतक का डीएनए नमूना सुरक्षित कर लिया गया है। आसपास के थानों में दर्ज गुमशुदगी के मामलों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है ताकि किसी लापता व्यक्ति से उसका मिलान किया जा सके।

शव की स्थिति और घटनास्थल की परिस्थितियों को देखते हुए हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव नदी में फेंके जाने की आशंका भी जांच के दायरे में है। हालांकि पुलिस फिलहाल किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है और हत्या, दुर्घटना अथवा अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखते हुए हर पहलू से जांच आगे बढ़ा रही है। पहचान की गुत्थी सुलझने के बाद ही मौत के असली कारणों से पर्दा उठने की उम्मीद है।

