धरती बचाने की मुहिम तेज: बक्सर में जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर

मिट्टी की गिरती उर्वरक क्षमता और रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए बक्सर जिला प्रशासन ने अब “धरती माता बचाओ” अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने की तैयारी तेज कर दी है। इसी कड़ी में सोमवार को समाहरणालय परिसर स्थित सभाकक्ष में जिलाधिकारी साहिला की अध्यक्षता में जिला स्तरीय “धरती माता बचाओ निगरानी समिति” की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

धरती बचाने की मुहिम तेज: बक्सर में जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर

--डीएम साहिला की अध्यक्षता में ‘धरती माता बचाओ’ निगरानी समिति की बैठक, रासायनिक उर्वरकों के कम इस्तेमाल और स्वायल हेल्थ कार्ड आधारित खेती पर बनी रणनीति

केटी न्यूज/बक्सर

मिट्टी की गिरती उर्वरक क्षमता और रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए बक्सर जिला प्रशासन ने अब “धरती माता बचाओ” अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने की तैयारी तेज कर दी है। इसी कड़ी में सोमवार को समाहरणालय परिसर स्थित सभाकक्ष में जिलाधिकारी साहिला की अध्यक्षता में जिला स्तरीय “धरती माता बचाओ निगरानी समिति” की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधियों तथा समिति के सदस्यों ने भाग लिया।बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि लगातार बढ़ते रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ रहा है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को जैविक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि खेती की पारंपरिक पद्धतियों को पुनर्जीवित करने और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए अब व्यवहारिक स्तर पर काम करने की जरूरत है।बैठक में दुकानदारों और उर्वरक विक्रेताओं की भूमिका को भी अहम माना गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी दुकानदार किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड के अनुरूप ही उर्वरक उपयोग की सलाह दें और उसी आधार पर उर्वरकों की बिक्री सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि बिना मिट्टी परीक्षण के अंधाधुंध उर्वरक उपयोग से खेती की लागत बढ़ रही है और जमीन की उर्वरा शक्ति लगातार कमजोर हो रही है।

उप विकास आयुक्त ने भी बैठक में किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से खेती अपनाने पर ही खेती टिकाऊ बन सकती है। किसानों को यह समझाने की जरूरत है कि कम लागत और बेहतर उत्पादन के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग बेहद जरूरी है।कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सर के कार्यक्रम समन्वयक को अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्हें निर्देश दिया गया कि “धरती माता बचाओ” अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए तथा किसानों के बीच जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इसके अलावा फार्मर रजिस्ट्रेशन कैंपों में भी संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खेती और मिट्टी संरक्षण जैसे विषयों पर चर्चा कराने का आदेश दिया गया।

बैठक में यह भी तय किया गया कि जिले के सभी प्रखंडों से जैविक खेती करने वाले पांच-पांच किसानों की सूची तैयार कर उपलब्ध कराई जाएगी। इन किसानों को मॉडल किसान के रूप में चिन्हित कर अन्य किसानों को प्रेरित करने की योजना बनाई जा रही है। प्रशासन का मानना है कि सफल जैविक किसानों के अनुभव और उदाहरण से ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से जागरूकता फैलेगी।बैठक में मौजूद विभिन्न उर्वरक कंपनियों के क्षेत्रीय प्रबंधकों को भी निर्देश दिया गया कि वे किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करें और केवल बिक्री बढ़ाने के बजाय मिट्टी संरक्षण की दिशा में जिम्मेदारी निभाएं।जिला प्रशासन की इस पहल को खेती और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि अभियान जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू हुआ तो आने वाले समय में बक्सर जिले में जैविक खेती को नई पहचान मिल सकती है।