बक्सर में गेहूं कटनी प्रयोग का निरीक्षण, 36.82 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज का अनुमान
कृषि वर्ष 2025-26 के तहत रब्बी गेहूं फसल के कटनी प्रयोग का निरीक्षण शुक्रवार को बक्सर सदर प्रखंड अंतर्गत दलसागर पंचायत के हरिकिशुनपुर गांव में किया गया। यह निरीक्षण बिहार सरकार के अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, पटना के उप निदेशक वीरेन्द्र कुमार द्वारा किया गया।

--किसानों को सटीक उपज आंकड़ा उपलब्ध कराने और योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की पहल
केटी न्यूज/बक्सर
कृषि वर्ष 2025-26 के तहत रब्बी गेहूं फसल के कटनी प्रयोग का निरीक्षण शुक्रवार को बक्सर सदर प्रखंड अंतर्गत दलसागर पंचायत के हरिकिशुनपुर गांव में किया गया। यह निरीक्षण बिहार सरकार के अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, पटना के उप निदेशक वीरेन्द्र कुमार द्वारा किया गया।कटनी प्रयोग स्थानीय कृषक सिद्धनाथ तिवारी के खेत (खेसरा संख्या-33) में आयोजित किया गया, जिसे पंचायत दलसागर के किसान सलाहकार ओम प्रकाश की देखरेख में संपन्न कराया गया। इस प्रयोग का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में गेहूं की वास्तविक उपज का वैज्ञानिक तरीके से आकलन करना तथा किसानों के लिए सटीक उत्पादन आंकड़ा उपलब्ध कराना है।

प्रयोग के दौरान 10 मीटर लंबे और 5 मीटर चौड़ाई वाले आयताकार क्षेत्रफल में फसल की कटाई की गई। इस क्षेत्र से कुल 18.410 किलोग्राम गेहूं की उपज प्राप्त हुई। इस आधार पर प्रति हेक्टेयर औसत उपज 36.820 क्विंटल आंकी गई, जो क्षेत्र में फसल उत्पादन की अच्छी स्थिति को दर्शाता है।निरीक्षण के दौरान उप निदेशक वीरेन्द्र कुमार ने बताया कि इस प्रकार के कटनी प्रयोग से सरकार को वास्तविक उत्पादन का आंकलन करने में मदद मिलती है, जिससे कृषि योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव हो पाता है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को भी उनकी फसल की उत्पादकता का सही आकलन मिलता है और भविष्य की खेती के लिए बेहतर रणनीति बनाने में सहायता मिलती है।

इस मौके पर जिला सांख्यिकी पदाधिकारी मोती कुमार, सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी पीयूष प्रताप सिंह, प्रखंड कृषि पदाधिकारी अंकित कुमार, अवर सांख्यिकी पदाधिकारी जीतेन्द्र कुमार, कृषि समन्वयक कमलेश कुमार पासवान सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।इसके अलावा स्थानीय किसानों में रामगृही पाण्डेय, कल्लू राम, कैलाशपति पाण्डेय, ददन पाण्डेय, रेखा देवी (पति शम्भु राम) सहित अन्य ग्रामीणों की भी सहभागिता रही।कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने किसानों से संवाद कर खेती से जुड़ी समस्याओं और सुझावों को भी सुना। साथ ही आधुनिक तकनीकों के उपयोग और वैज्ञानिक विधियों को अपनाने पर जोर दिया गया, ताकि उत्पादन में और वृद्धि की जा सके।

