मशीन नहीं देने पर कंपनी पर उपभोक्ता आयोग सख्त, ग्राहक को दिलाई 10.74 लाख की राहत

जिला उपभोक्ता आयोग के एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद एक उपभोक्ता को बड़ी राहत मिली है। मशीन उपलब्ध कराने में लापरवाही बरतने वाली कंपनी को आखिरकार उपभोक्ता के पक्ष में झुकना पड़ा और बुधवार को परिवादी को 7 लाख 67 हजार 422 रुपये का बैंक ड्राफ्ट सौंपा गया। शेष 3 लाख 7 हजार रुपये भी उपभोक्ता को राज्य उपभोक्ता आयोग से प्राप्त होंगे। इस तरह कुल 10 लाख 74 हजार रुपये की राशि उपभोक्ता को मिलेगी।

मशीन नहीं देने पर कंपनी पर उपभोक्ता आयोग सख्त, ग्राहक को दिलाई 10.74 लाख की राहत

--दो चरणों में होगी पूरी राशि की अदायगी, आयोग के आदेश के बाद कंपनी ने सौंपी 7.67 लाख की राशि

केटी न्यूज/बक्सर

जिला उपभोक्ता आयोग के एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद एक उपभोक्ता को बड़ी राहत मिली है। मशीन उपलब्ध कराने में लापरवाही बरतने वाली कंपनी को आखिरकार उपभोक्ता के पक्ष में झुकना पड़ा और बुधवार को परिवादी को 7 लाख 67 हजार 422 रुपये का बैंक ड्राफ्ट सौंपा गया। शेष 3 लाख 7 हजार रुपये भी उपभोक्ता को राज्य उपभोक्ता आयोग से प्राप्त होंगे। इस तरह कुल 10 लाख 74 हजार रुपये की राशि उपभोक्ता को मिलेगी।मामला सिमरी थाना क्षेत्र के केशोपुर निवासी अमरकांत रजक से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, उन्होंने एसके इंजीनियर कंपनी को मशीन खरीदने के लिए भुगतान किया था, लेकिन लंबे समय तक कंपनी द्वारा मशीन उपलब्ध नहीं कराई गई।

इससे परेशान होकर अमरकांत रजक ने जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली थी।परिवादी के अधिवक्ता विष्णु दत्त द्विवेदी ने बताया कि सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को निर्धारित अवधि के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया था। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा था कि दो महीने के अंदर पूरी राशि का भुगतान नहीं करने पर कंपनी को 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।जिला आयोग के आदेश के खिलाफ विपक्षी कंपनी ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की थी। अपील के दौरान कंपनी ने नियमानुसार 3 लाख 7 हजार रुपये राज्य आयोग में जमा कराए थे। बाद में जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश के अनुपालन में शेष राशि का भुगतान परिवादी को कर दिया गया।

बुधवार को जिला उपभोक्ता आयोग परिसर में आयोजित प्रक्रिया के दौरान अध्यक्ष सह सेवानिवृत्त न्यायाधीश वेद प्रकाश सिंह एवं सदस्य राजीव सिंह की उपस्थिति में परिवादी अमरकांत रजक को 7 लाख 67 हजार रुपये का ड्राफ्ट सौंपा गया। आयोग की इस कार्रवाई को उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए भी संदेश है, जो कंपनियों की लापरवाही का शिकार होने के बावजूद कानूनी प्रक्रिया से बचते हैं। आयोग के इस निर्णय से उपभोक्ताओं का भरोसा न्याय व्यवस्था पर और मजबूत हुआ है।