चघाटों पर उमड़ी आस्था की भीड़, व्रतियों ने भगवान भास्कर को दिया पहला अर्घ्य
सूर्य उपासना के चार दिवसीय महापर्व चैती छठ के अवसर पर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न घाटों पर मंगलवार को व्रतियों ने भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य अर्पित किया। इस दौरान घाटों पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह से ही व्रती पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना करते नजर आए, जिससे पूरे क्षेत्र का माहौल भक्तिमय हो गया।प्रखंड परिसर पोखरा, केसठ स्थित छठ घाट पर छठ पूजा सेवा समिति द्वारा व्रतियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं।
केटी न्यूज/केसठ।
सूर्य उपासना के चार दिवसीय महापर्व चैती छठ के अवसर पर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न घाटों पर मंगलवार को व्रतियों ने भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य अर्पित किया। इस दौरान घाटों पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह से ही व्रती पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना करते नजर आए, जिससे पूरे क्षेत्र का माहौल भक्तिमय हो गया।प्रखंड परिसर पोखरा, केसठ स्थित छठ घाट पर छठ पूजा सेवा समिति द्वारा व्रतियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। घाटों पर साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराई गई।

साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर विभिन्न घाटों पर पुलिस बल की तैनाती भी की गई थी।छठ पूजा सेवा समिति के अध्यक्ष राहुल कुमार ने बताया कि व्रतियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए समिति के सभी सदस्य पूरी तत्परता से सेवा में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि घाटों पर हर आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे श्रद्धालु सुरक्षित और सहज तरीके से पूजा संपन्न कर सकें। वही बुधवार को भगवान भास्कर को दूसरी अर्घ्य अर्पित किया जाएगा।घाटों की ओर जाते समय व्रतियों में गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिला।

महिलाएं सिर पर दौरा और प्रसाद लेकर पारंपरिक छठ गीत गाते हुए श्रद्धा के साथ घाटों की ओर बढ़ती नजर आईं। “केलवा के पात पर उगेलन सूरज देव…” जैसे लोकगीतों की मधुर ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस दौरान गांव के युवकों ने व्रतियों के माथे पर रखे दौरा को उठाकर घाट तक पहुंचाने में सहयोग किया, जिसे वे अपना सौभाग्य मानते हैं। युवकों का कहना था कि छठ व्रतियों की सेवा करना उनके लिए गर्व और पुण्य का कार्य है। रास्ते भर श्रद्धालुओं की भीड़ और छठ गीतों की गूंज ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया, जिससे पर्व की गरिमा और भी बढ़ गई।

