रामराज्य की परिकल्पना पर मंथन, कथा में सुशासन और लोककल्याण का दिया संदेश

स्थानीय कोपवां स्थित काली आश्रम परिसर में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव में रविवार को रामराज्य की आदर्श व्यवस्था, सुशासन और लोककल्याण के संदेश पर विशेष चर्चा हुई। कथावाचक पंडित श्री मधुसूदन बिहारी जी महाराज ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि राम का चरित्र केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज और शासन के लिए आदर्श मार्गदर्शक भी है।

रामराज्य की परिकल्पना पर मंथन, कथा में सुशासन और लोककल्याण का दिया संदेश

डुमरांव, केटी न्यूज।

स्थानीय कोपवां स्थित काली आश्रम परिसर में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव में रविवार को रामराज्य की आदर्श व्यवस्था, सुशासन और लोककल्याण के संदेश पर विशेष चर्चा हुई। कथावाचक पंडित श्री मधुसूदन बिहारी जी महाराज ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि राम का चरित्र केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज और शासन के लिए आदर्श मार्गदर्शक भी है।कथा के दौरान उन्होंने रावण वध के प्रसंग को धर्म और सत्य की विजय का प्रतीक बताते हुए कहा कि ज्ञान और शक्ति तभी सार्थक हैं, जब उनका उपयोग जनकल्याण के लिए हो।अहंकार और अन्याय का परिणाम अंततः विनाश ही होता है।

भगवान श्रीराम ने अपने आचरण और संघर्ष के माध्यम से यह संदेश दिया कि सत्य, मर्यादा और कर्तव्य के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति अंततः विजय प्राप्त करता है।महाराज ने लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन और राजतिलक का प्रसंग सुनाते हुए रामराज्य की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रामराज्य में न्याय, समानता, सुरक्षा और करुणा का वातावरण था। समाज का प्रत्येक वर्ग सम्मान और संतोष के साथ जीवन व्यतीत करता था। शासन का उद्देश्य केवल प्रशासन चलाना नहीं, बल्कि जनता के सुख-दुख में सहभागी बनकर उनके कल्याण को सुनिश्चित करना था।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी रामराज्य की अवधारणा प्रासंगिक है और समाज को आपसी सद्भाव, नैतिक मूल्यों तथा जनहित की भावना अपनाने की प्रेरणा देती है। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे रहे तथा जय श्रीराम के उद्घोष और भजन-कीर्तन से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। कथा समाप्ति के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।