Sunday, 8 November 2026
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गेट पर प्रसव ने खोली चक्की पीएचसी की पोल, सिस्टम फेल, लापरवाही या लचर व्यवस्था

चक्की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का एक गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक गर्भवती महिला को अस्पताल के भीतर नहीं, बल्कि मुख्य गेट पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। यह घटना न सिर्फ मानवीय संवेदनाओं पर सवाल उठाती है, बल्कि पूरे सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप लगाती है।

गेट पर प्रसव ने खोली चक्की पीएचसी की पोल, सिस्टम फेल, लापरवाही या लचर व्यवस्था

__ डॉक्टर-स्टाफ नदारद, ड्यूटी विवाद में उलझा अस्पताल, बीडीओ ने मांगा जवाब, जांच के आदेश

केटी न्यूज/डुमरांव

चक्की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का एक गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक गर्भवती महिला को अस्पताल के भीतर नहीं, बल्कि मुख्य गेट पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। यह घटना न सिर्फ मानवीय संवेदनाओं पर सवाल उठाती है, बल्कि पूरे सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप लगाती है।जानकारी के अनुसार, भोला डेरा की रहने वाली रेणु देवी को गुरुवार सुबह प्रसव पीड़ा के बाद पीएचसी में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि पूरे दिन महिला को न तो समुचित चिकित्सा सुविधा मिली और न ही नियमित निगरानी।

गेट पर प्रसव ने खोली चक्की पीएचसी की पोल, सिस्टम फेल, लापरवाही या लचर व्यवस्था

अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और नर्सिंग स्टाफ की उदासीनता के कारण स्थिति बिगड़ती चली गई।शाम होते-होते जब महिला की हालत गंभीर होने लगी, तब परिजन उसे निजी अस्पताल ले जाने के लिए बाहर निकाल रहे थे। इसी दौरान अस्पताल के मुख्य गेट पर ही प्रसव हो गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उस वक्त अस्पताल परिसर में मौजूद किसी भी स्वास्थ्यकर्मी ने तत्काल मदद के लिए पहल नहीं की। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त संवेदनहीनता की एक कड़वी तस्वीर पेश करती है।

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__ जिम्मेदारी से बचता प्रशासन, जीएनएम पर ठीकरा

घटना के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में जरूर आया, लेकिन जिम्मेदारी तय करने के बजाय एक-दूसरे पर आरोप लगाने का सिलसिला शुरू हो गया। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अंजनी कुमार ने ड्यूटी पर तैनात जीएनएम सारिका कुमारी को दोषी ठहराते हुए उनसे 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने कहा कि जीएनएम की लापरवाही और उदासीनता के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई और यह कोई पहली बार नहीं है।वहीं, जीएनएम सारिका कुमारी ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि घटना के समय वे अस्पताल में ड्यूटी पर थीं ही नहीं। उनका कहना है कि उन्हें पूर्व आदेश के तहत फील्ड में टीकाकरण कार्य के लिए भेजा गया था, जहां वे सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक व्यस्त थीं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर उस समय अस्पताल में जिम्मेदार कौन था।

गेट पर प्रसव ने खोली चक्की पीएचसी की पोल, सिस्टम फेल, लापरवाही या लचर व्यवस्था

__  एक ही दिन में दूसरा मामला भी आया सामने

इसी दिन एक और मामला सामने आया, जिसने पीएचसी की लचर व्यवस्था की पोल खोल दी। हेनवा गांव के कृष्णा कुमार अपनी पत्नी का प्रसव कराने अस्पताल पहुंचे, लेकिन काफी देर तक इंतजार के बावजूद कोई डॉक्टर या स्टाफ सक्रिय नहीं दिखा। मजबूर होकर उन्हें अपनी पत्नी को निजी अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां सुरक्षित प्रसव कराया गया।

__  बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव

स्थानीय लोगों का कहना है कि चक्की पीएचसी में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। अस्पताल में केवल एक एम्बुलेंस है, जो लंबे समय से खराब पड़ी है। डॉक्टरों की संख्या बेहद कम है और अल्ट्रासाउंड जैसी जरूरी जांच की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गरीब और ग्रामीण मरीजों को मजबूरी में महंगे निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।

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__  जांच के आदेश, लेकिन क्या बदलेगा हाल

घटना को लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी लालबाबू पासवान ने भी संज्ञान लिया है और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से विस्तृत प्रतिवेदन मांगा है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ जांच और स्पष्टीकरण से ऐसी घटनाओं पर रोक लग पाएगी, या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा? जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदारी तय कर ठोस कार्रवाई की जाए और स्वास्थ्य सेवाओं में तत्काल सुधार लाया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज को ऐसी दर्दनाक स्थिति का सामना न करना पड़े।

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