Saturday, 7 November 2026
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विकलांग का जर्जर मकान भरभरा कर गिरा,सिर छिपाने की जगह नहीं

विकलांग का जर्जर मकान भरभरा कर गिरा,सिर छिपाने की जगह नहीं

केटी न्यूज/चंदौली

विकलांग का जर्जर मकान भरभरा कर गिरा,सिर छिपाने की जगह नहीं

क्षेत्र के ग्राम सभा एलही निवासी कयामुद्दीन के जर्जर कच्चा मकान गुरुवार की भोर में अचानक भरभरा कर जमींदोज हो गया। अचानक हुई इस घटना में गरीब परिवार के घर-गृहस्था का सारा सामान दबकर नष्ट हो गया। जिससे दोनों पैर से विकलांग कयामुद्दीन के पूरे परिवार के सिर से आशियाना छिन गया। घटना के बाद पूरा परिवार आहत एवं मर्माहत है। न तो उनके पास खाने के लिए अन्न है और ना ही सिर छिपाने के लिए कोई आशियाना है।

विकलांग का जर्जर मकान भरभरा कर गिरा,सिर छिपाने की जगह नहीं

विदित हो कि विकलांग कयामुद्दीन 46 वर्ष अपनी पत्नी अफरोजी बेगम 40 वर्ष, पुत्री आफरीन 16 वर्ष, पुत्र इमामुद्दीन 13 वर्ष व इस्लामुद्दीन 10 वर्ष एवं 75 वर्षीय पिता रहमतुल्लाह अंसारी कच्चे मकान में रहते थे। कयामुद्दीन अपने पिता की इकलौती संतान है, जो दोनों पैर से विकलांग है। गरीबी व विकलांगता के कारण इनका पूरा परिवार आर्थिक दंगी झेल रहा है। कयामुद्दीन ने विकलांग पेंशन के लिए आवेदन भी किया है,

विकलांग का जर्जर मकान भरभरा कर गिरा,सिर छिपाने की जगह नहीं

लेकिन आज तक पेंशन भी नहीं मिल सका है। जबकि पिता जी वरिष्ठ नागरिक हैं। लेकिन गरीबी और पेट की भूख इंसान को मजबूर कर देती हैं। विकलांग बेटे क्यामुदीन के परिवार की आजीविका के लिए 75 वर्षीय पिता रहमतुल्लाह मजदूरी करते हैं जिससे अपना और पूरे परिवार का पालन पोषण करते हैं। परिवार चलाने में थोड़ी मदद क्यामू की बीबी अफरोजी घर में बीड़ी बनाकर बच्चों को पढ़ाने में करती है।

विकलांग का जर्जर मकान भरभरा कर गिरा,सिर छिपाने की जगह नहीं

पूरा परिवार कच्चे मकान में निवास करता है और किसी तरह गुजर बसर करता है। पक्के मकान के आस में टकटकी लगाए बैठा कयामुद्दीन के परिवार पर गुरुवार की भोर में उस वक्त संकट गहरा गया, जब उनका कच्चा मकान अचानक भरभरा कर गिर पड़ा। मकान के मलबे में दबकर गरीब के गृहस्थी का सामान दब कर नष्ट हो गया। संयोग अच्छा रहा कि परिवार बाल बाल बच गए।

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