डीके कॉलेज में सुविधाओं पर प्रबंधन ने गिनाईं उपलब्धियां, आरोपों को बताया निराधार
डुमरांव स्थित डीके कॉलेज में लाइब्रेरी और ऑडिटोरियम समेत विभिन्न मांगों को लेकर छात्रों और पूर्व छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद अब कॉलेज प्रबंधन ने अपना पक्ष सामने रखा है। प्राचार्या डॉ. वीणा कुमारी ने कॉलेज में वित्तीय अनियमितता, छात्रों से अवैध वसूली और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जुड़े आरोपों को निराधार बताया है।

__ पीजी-पीएचडी समेत छात्रों की मांगों पर विश्वविद्यालय स्तर से हो रही समीक्षा, नए विषयों की पढ़ाई शुरू कराने का भेजा प्रस्ताव
केटी न्यूज/डुमरांव।
डुमरांव स्थित डीके कॉलेज में लाइब्रेरी और ऑडिटोरियम समेत विभिन्न मांगों को लेकर छात्रों और पूर्व छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद अब कॉलेज प्रबंधन ने अपना पक्ष सामने रखा है। प्राचार्या डॉ. वीणा कुमारी ने कॉलेज में वित्तीय अनियमितता, छात्रों से अवैध वसूली और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जुड़े आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि कॉलेज में शैक्षणिक एवं आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।प्राचार्या ने सोमवार को कॉलेज परिसर के कई कक्षाओं और शौचालयों का निरीक्षण किया। उन्होंने दावा किया कि कॉलेज के सभी शौचालय उपयोग की दृष्टि से बेहतर स्थिति में हैं। विद्यार्थियों के लिए तीन वाटर कूलर वर्तमान में चालू हैं, जबकि तीन अन्य वाटर कूलर कॉलेज को प्राप्त हो चुके हैं। उनके अनुसार सफाई व्यवस्था में भी सुधार हुआ है और नियमित रूप से कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है।

__नए विषयों की पढ़ाई के लिए विश्वविद्यालय को प्रस्ताव
कॉलेज प्रबंधन ने शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार को लेकर विश्वविद्यालय स्तर पर भेजे गए प्रस्तावों की भी जानकारी दी। प्राचार्या के अनुसार व्यवसायिक शिक्षा के तहत स्नातक प्रतिष्ठा स्तर पर वाणिज्य की पढ़ाई सत्र 2026-29 से शुरू कराने के लिए कुलसचिव को लिखित प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं सत्र 2026-28 से भूगोल, मनोविज्ञान, हिंदी और राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर विभाग शुरू करने का प्रस्ताव भी विश्वविद्यालय को भेजा गया है।इसके अलावा इतिहास और उर्दू विषयों की पढ़ाई सत्र 2026-30 से स्थायी संबंधन के साथ शुरू कराने की दिशा में भी आवेदन किया गया है। प्रबंधन का कहना है कि इन प्रस्तावों के मंजूर होने के बाद कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के विकल्पों का दायरा और बढ़ेगा।

__छात्रों की मांगों पर विश्वविद्यालय कर रहा विचार
गुरुवार को कॉलेज पहुंचे कुलपति को छात्रों ने अपनी मांगों से संबंधित विस्तृत ज्ञापन सौंपा था। इसमें पीजी और पीएचडी की पढ़ाई शुरू कराने, 7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता में शिथिलता देने तथा हाल के वर्षों में बढ़ाई गई फीस में कटौती सहित कई मांगें शामिल थीं। कॉलेज प्रबंधन के अनुसार इन मांगों की विश्वविद्यालय स्तर पर समीक्षा की जा रही है। कुछ मांगों को उचित मानते हुए उन पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है, जबकि कुछ आरोपों को तथ्यहीन बताया गया है।प्राचार्या ने स्पष्ट किया कि कॉलेज में किसी छात्र से आर्थिक उगाही या अनधिकृत रूप से राशि लेने का मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि कॉलेज की व्यवस्था को बदनाम करने के उद्देश्य से लगाए जा रहे ऐसे आरोपों में तथ्य नहीं है। प्रबंधन ने छात्रों से भी अपील की कि समस्याओं का समाधान संवाद और विश्वविद्यालय स्तर की प्रक्रिया के माध्यम से किया जाए।

