बरसात से पहले रघुनाथपुर की जल निकासी पर संकट, सीएचसी के पास नाला बंद होने से बढ़ी चिंता
मानसून की दस्तक से पहले रघुनाथपुर बाजार की जल निकासी व्यवस्था गंभीर संकट में घिरती दिखाई दे रही है। रघुनाथपुर–बगेन मुख्य मार्ग पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के समीप मुख्य जल निकासी नाले को मिट्टी से भर दिए जाने के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है।

__ पुलिया की मरम्मत के बजाय मिट्टी डालकर अवरुद्ध किया गया नाला; बाजार, अस्पताल और आसपास के इलाकों में जलभराव की आशंका, ग्रामीणों ने डीएम से कार्रवाई की मांग
केटी न्यूज/ब्रह्मपुर।
मानसून की दस्तक से पहले रघुनाथपुर बाजार की जल निकासी व्यवस्था गंभीर संकट में घिरती दिखाई दे रही है। रघुनाथपुर–बगेन मुख्य मार्ग पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के समीप मुख्य जल निकासी नाले को मिट्टी से भर दिए जाने के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द नाले को चालू नहीं कराया गया तो पहली ही तेज बारिश में बाजार, अस्पताल परिसर और आसपास के रिहायशी क्षेत्रों में व्यापक जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।स्थानीय लोगों के अनुसार सीएचसी के पास स्थित पुलिया लंबे समय से ओवरलोड बालू लदे वाहनों के लगातार परिचालन के कारण जर्जर हो चुकी है। पुलिया से लोहे की सरिया बाहर निकल आई है और उसकी स्थिति किसी बड़े हादसे की आशंका को जन्म दे रही है।

इस समस्या के समाधान के लिए सामाजिक कार्यकर्ता शैलेश कुमार ओझा ने जिलाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों को आवेदन देकर पुलिया की मरम्मत की मांग की थी। आरोप है कि मरम्मत कराने के बजाय निर्माण एजेंसी ने पुलिया के दोनों ओर मिट्टी डालकर नाले का प्रवाह ही रोक दिया।ग्रामीणों का कहना है कि यह नाला कैथी, मरही टोला, आसपास के कृषि क्षेत्रों, रघुनाथपुर सब्जी बाजार, केनरा बैंक परिसर तथा बाजार क्षेत्र के वर्षा जल की निकासी का मुख्य माध्यम है। नाले के बंद होने से पूरे इलाके की जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते मिट्टी नहीं हटाई गई तो बारिश के दौरान अस्पताल आने वाले मरीजों, दुकानदारों, किसानों और स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ेगी।डॉ. ललन मिश्रा, विनोद ओझा, विंध्याचल शाही, आशीष कुमार, दिनेश कुमार, आकाश पाराशर और बड़क चौधरी सहित कई स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

उनका कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान किए बिना नाले को बंद करना पूरे क्षेत्र को जलभराव और दुर्घटना के खतरे में डालने जैसा है।समाजसेवी शैलेश कुमार ओझा ने सुझाव दिया है कि यदि सड़क निर्माण के लिए नाले को ढंकना आवश्यक हो तो पहले पर्याप्त क्षमता वाला आरसीसी बॉक्स ड्रेन अथवा बड़े व्यास के सीमेंटेड पाइप का निर्माण कराया जाए, ताकि वर्षा जल का प्राकृतिक प्रवाह बाधित न हो। साथ ही जर्जर पुलिया की तकनीकी जांच कराकर उसकी मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाए तथा ओवरलोड बालू लदे वाहनों के परिचालन पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए।ग्रामीणों और व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द नाले की सफाई, जल निकासी की बहाली और पुलिया की मरम्मत नहीं कराई गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे।

