भगवा रंग में रंगा डुमरांव, महाबीरी झंडा जुलूस को लेकर उत्साह चरम पर
रामनवमी के पावन अवसर पर डुमरांव शहर एक बार फिर भक्ति और उत्साह के रंग में पूरी तरह सराबोर हो चुका है। महाबीरी झंडा जुलूस को लेकर शहर में तैयारियां जोरों पर हैं। श्री महाबीरी झंडा पूजा समिति द्वारा पूरे नगर को भगवा झंडों से सजा दिया गया है, जिससे हर गली-मोहल्ला धार्मिक आस्था और उत्सव का संदेश देता नजर आ रहा है।

__ 27 मार्च को निकलेगा ऐतिहासिक जुलूस, हाथी-घोड़े, ऊंट और भव्य झांकियां होंगी आकर्षण का केंद्र
केटी न्यूज/डुमरांव
रामनवमी के पावन अवसर पर डुमरांव शहर एक बार फिर भक्ति और उत्साह के रंग में पूरी तरह सराबोर हो चुका है। महाबीरी झंडा जुलूस को लेकर शहर में तैयारियां जोरों पर हैं। श्री महाबीरी झंडा पूजा समिति द्वारा पूरे नगर को भगवा झंडों से सजा दिया गया है, जिससे हर गली-मोहल्ला धार्मिक आस्था और उत्सव का संदेश देता नजर आ रहा है।आयोजन को सफल और भव्य बनाने के लिए समिति के सदस्यों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा कर दिया गया है। हर सदस्य अपने-अपने दायित्व को पूरी निष्ठा के साथ निभाने में जुटा है। दिन-रात की मेहनत से जुलूस को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी चल रही है।

समिति के अनुसार, 27 मार्च को रामनवमी के दिन सुबह छठिया पोखरा स्थित हनुमान मंदिर में पारंपरिक शस्त्र पूजन किया जाएगा। इसके बाद शाम को राजगढ़ के विशाल फाटक से भव्य जुलूस की शुरुआत होगी, जो पूरे शहर का भ्रमण करेगा।इस बार जुलूस की खास बात यह है कि इसमें पारंपरिक धार्मिक झांकियों के साथ-साथ विविध सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिलेंगे। जुलूस में हाथी, घोड़े और ऊंट की सवारी आकर्षण का प्रमुख केंद्र होगी। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों से आए ढोल-ताशे दल अपनी प्रस्तुति से माहौल को और अधिक जीवंत बनाएंगे।झांकियों में मां काली की भव्य प्रतिमा, अघोर नृत्य और राम दरबार की झलक श्रद्धालुओं को भावविभोर कर देगी।

खास बात यह है कि इस बार दक्षिण भारतीय संस्कृति की झलक भी जुलूस में देखने को मिलेगी, जिससे आयोजन की भव्यता और बढ़ जाएगी।शहरवासियों में इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस पर्व को लेकर उत्साहित हैं। बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है और हर ओर तैयारियों की गूंज सुनाई दे रही है।आयोजन समिति का दावा है कि इस वर्ष का महाबीरी झंडा जुलूस पहले के मुकाबले कहीं अधिक भव्य, आकर्षक और ऐतिहासिक होगा। यह न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक बनेगा, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विविधता का भी संदेश देगा।

