नेपाल की धरती पर चमका डुमरांव का नाम, शिक्षक डॉ. मनीष कुमार शशि को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान
बक्सर जिले के डुमरांव के लिए गर्व का क्षण तब आया जब स्थानीय शिक्षक डॉ. मनीष कुमार शशि को नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन में उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और नवाचारी शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।

__ विद्यार्थियों के हित में नवाचार, डिजिटल शिक्षा और ड्रॉपआउट बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों को मिली वैश्विक पहचान
केटी न्यूज/डुमरांव
बक्सर जिले के डुमरांव के लिए गर्व का क्षण तब आया जब स्थानीय शिक्षक डॉ. मनीष कुमार शशि को नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन में उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और नवाचारी शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।त्रिभुवन विश्वविद्यालय, काठमांडू के कानून विभाग सभागार में आयोजित भारत-नेपाल शिक्षा सम्मेलन सह अंतरराष्ट्रीय उत्कृष्ट शिक्षा पुरस्कार समारोह में दोनों देशों के शिक्षाविदों, शिक्षा विशेषज्ञों और बौद्धिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। समारोह में डॉ. मनीष कुमार शशि को शिक्षा के क्षेत्र में उनके समर्पित योगदान के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

सम्मान समारोह में त्रिभुवन विश्वविद्यालय के डीन प्रो. (डॉ.) डी.एन. पराजुली, नेपाल के चीफ ऑफ लीगल एजुकेशन डॉ. लक्ष्मी प्रसाद मैनाली, पटना लॉ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वाणी भूषण, शिक्षाविद् डॉ. गुरु रहमान, टीएफएम शिक्षक ऑनलाइन ग्रुप के संस्थापक डॉ. सुरेश, संयोजक डॉ. एस.के. पाण्डेय, अंजू कुमारी और अमर जायसवाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वहीं ऑनलाइन माध्यम से प्रसिद्ध गणितज्ञ डॉ. के.सी. सिन्हा और एससीईआरटी के संजय कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित कर शुभकामनाएं दीं।डॉ. मनीष कुमार शशि लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने, डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने और पढ़ाई बीच में छोड़ चुके बच्चों को पुनः विद्यालय से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

शिक्षा के साथ-साथ वे सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग तथा भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता और निस्वार्थ सेवा की चर्चा अक्सर होती रही है।समारोह में वक्ताओं ने कहा कि बदलते समय में शिक्षा की चुनौतियां भी बदल रही हैं और ऐसे दौर में डॉ. मनीष जैसे शिक्षक नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं। शिक्षाविद् डॉ. गुरु रहमान ने कहा कि ब्लैकबोर्ड से टैबलेट तक की यात्रा में डॉ. मनीष ने साबित किया है कि एक समर्पित शिक्षक अपने प्रयासों से विद्यार्थियों का भविष्य संवार सकता है।सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. मनीष कुमार शशि ने कहा कि यह पुरस्कार केवल उनका नहीं, बल्कि उनके विद्यार्थियों की मेहनत और विश्वास का सम्मान है।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उन्हें और अधिक जिम्मेदारी के साथ शिक्षा एवं विद्यार्थियों के विकास के लिए कार्य करने की प्रेरणा देती है।उनकी इस उपलब्धि पर भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव शत्रुघ्न प्रसाद गुप्ता, प्रदीप जायसवाल, डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सिंह, विकास कुमार, धनंजय पांडेय, प्रमोद कुमार चौबे, अनीता यादव, विशाल जायसवाल, अमित कुमार, डॉ. अशफाक आलम और डॉ. परवेज आलम सहित जिले के कई शिक्षाविदों और समाजसेवियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है।

