समाज बना सहारा, अनाथ बेटियों की धूमधाम से हुई शादी

रक्त संबंधों से परे समाज भी किसी का अभिभावक बन सकता है। इसका प्रेरक उदाहरण शनिवार को बक्सर शहर के श्री श्याम उत्सव वाटिका में देखने को मिला, जहां सामाजिक सहयोग और सामूहिक सहभागिता से दो आर्थिक रूप से कमजोर एवं अनाथ बेटियों का विवाह पूरे सम्मान और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ संपन्न कराया गया।

समाज बना सहारा, अनाथ बेटियों की धूमधाम से हुई शादी

__ बक्सर में सामाजिक सहयोग से संपन्न हुआ सामूहिक विवाह, शिक्षा और सम्मान के साथ बेटियों को मिली नई जिंदगी की शुरुआत

केटी न्यूज/बक्सर

रक्त संबंधों से परे समाज भी किसी का अभिभावक बन सकता है। इसका प्रेरक उदाहरण शनिवार को बक्सर शहर के श्री श्याम उत्सव वाटिका में देखने को मिला, जहां सामाजिक सहयोग और सामूहिक सहभागिता से दो आर्थिक रूप से कमजोर एवं अनाथ बेटियों का विवाह पूरे सम्मान और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ संपन्न कराया गया।विवाह बंधन में बंधने वाली दोनों युवतियां शहर के मेन रोड और नई बाजार क्षेत्र की निवासी हैं। इनमें एक युवती अपने माता-पिता को खो चुकी है, जबकि दूसरी की मां का निधन हो चुका है। विषम परिस्थितियों के बावजूद दोनों अपने रिश्तेदारों के संरक्षण में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रही थीं।

इनमें से एक युवती बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी कर रही है।समारोह को यादगार बनाने के लिए समाज के लोगों ने आर्थिक, सामाजिक और नैतिक स्तर पर भरपूर सहयोग दिया। सुसज्जित मंडप में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोनों जोड़ों ने सात फेरे लिए और वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत की। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने नवदंपतियों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद एवं समृद्ध भविष्य की कामना की।इस सामाजिक पहल को सफल बनाने में समाजसेवी अजय मानसिंह, बक्सर लाइव न्यूज के संस्थापक पंकज पांडेय, रामजी सिंह, डॉ. श्रवण तिवारी, डॉ. ए.के. सिंह, नियमतुल्ला फरीदी, शेखर कुमार, जयप्रकाश कुशवाहा, राहुल, पंकज समेत अनेक लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सभी के सामूहिक प्रयास से विवाह की प्रत्येक व्यवस्था गरिमामय और व्यवस्थित ढंग से पूरी की गई।विदाई के समय दोनों नवविवाहिताओं को अलमारी, पलंग, ड्रेसिंग टेबल, सिलाई मशीन, कूलर सहित गृहस्थी के आवश्यक सामान उपहार स्वरूप भेंट किए गए। डोली विदा होने के दौरान मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।यह आयोजन केवल दो बेटियों के विवाह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गया कि सामूहिक सहयोग और संवेदनशीलता से जरूरतमंद परिवारों के जीवन में नई उम्मीद और खुशियां लाई जा सकती हैं।