बक्सर में बाढ़ का बढ़ा दायरा, 5 प्रखंडों के 24 गांव प्रभावित

बक्सर जिले में गंगा समेत विभिन्न नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ की स्थिति को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। आपदा प्रबंधन शाखा से रविवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार जिले के 5 प्रखंडों की 12 पंचायतों के 24 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासन के आकलन के मुताबिक करीब 9,989 लोग बाढ़ की चपेट में हैं।

बक्सर में बाढ़ का बढ़ा दायरा, 5 प्रखंडों के 24 गांव प्रभावित

__ 12 पंचायतों में लगभग 9,989 लोग बाढ़ से प्रभावित, राहत-बचाव के लिए 36 नावें और 4 बोट एंबुलेंस तैनात

__ बक्सर में बाढ़ का बढ़ा दायरा, 5 प्रखंडों के 24 गांव प्रभावित

केटी न्यूज/बक्सर

बक्सर जिले में गंगा समेत विभिन्न नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ की स्थिति को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। आपदा प्रबंधन शाखा से रविवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार जिले के 5 प्रखंडों की 12 पंचायतों के 24 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासन के आकलन के मुताबिक करीब 9,989 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी के साथ राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं।बाढ़ प्रभावित गांवों में आवागमन और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के लिए 36 नावों का परिचालन किया जा रहा है। आपात स्थिति में मरीजों को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने के लिए 4 बोट एंबुलेंस भी उपलब्ध कराई गई हैं।

वहीं, बाढ़ के दौरान घरों और सामान को सुरक्षित रखने के लिए अब तक 853 पॉलीथिन शीट का वितरण किया जा चुका है। राहत एवं बचाव अभियान को प्रभावी बनाने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी तैनात हैं।हालांकि, प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार फिलहाल अनुमानित प्रभावित परिवारों और विस्थापित आबादी की संख्या शून्य दर्ज की गई है। इसी तरह प्रभावित क्षेत्रों में अभी तक कोई चिकित्सा शिविर अथवा पशु चिकित्सा शिविर संचालित नहीं किया गया है। प्रशासन का कहना है कि परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक सेवाओं को तत्काल सक्रिय किया जाएगा।

राहत व्यवस्था के तहत फिलहाल कोई राहत केंद्र या सामुदायिक रसोई संचालित नहीं की गई है। राहत केंद्रों में शरण लेने वालों की संख्या, सामुदायिक रसोई में भोजन करने वालों की संख्या तथा वितरित फूड पैकेट या ड्राई राशन पैकेट की संख्या भी अभी शून्य है।जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों को जलस्तर, आवागमन और ग्रामीणों की जरूरतों पर सतत निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने आवश्यकता पड़ने पर राहत और बचाव कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन तत्काल उपलब्ध कराने की तैयारी भी रखी है।