चैत्र नवरात्र में आस्था और लोकसंस्कृति का संगम, मुरा बाबा वार्षिकोत्सव में उमड़ी भीड़

चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर चौसा क्षेत्र में आयोजित मुरा बाबा का वार्षिकोत्सव इस बार आस्था, परंपरा और लोकसंस्कृति का अनूठा संगम बन गया। चैत्र सप्तमी के दिन बनारपुर और सिकरौल के समीप प्लांट स्थल स्थित मुरा बाबा मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और दर्शक शामिल हुए।

चैत्र नवरात्र में आस्था और लोकसंस्कृति का संगम, मुरा बाबा वार्षिकोत्सव में उमड़ी भीड़

केटी न्यूज/चौसा

चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर चौसा क्षेत्र में आयोजित मुरा बाबा का वार्षिकोत्सव इस बार आस्था, परंपरा और लोकसंस्कृति का अनूठा संगम बन गया। चैत्र सप्तमी के दिन बनारपुर और सिकरौल के समीप प्लांट स्थल स्थित मुरा बाबा मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और दर्शक शामिल हुए।सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ पूजा-अर्चना के लिए उमड़ पड़ी। पूरे विधि-विधान के साथ मुरा बाबा की पूजा की गई, जिसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर शुरू हुआ।

आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा भव्य दुगोला चैता गायन, जिसमें आरा के व्यास रामाशंकर सिंह और अरवल के व्यास सुदर्शन यादव के बीच मुकाबला हुआ।दोनों कलाकारों ने राम जन्म से जुड़े गीतों के माध्यम से सवाल-जवाब की शैली में ऐसा समां बांधा कि श्रोता देर शाम तक मंत्रमुग्ध होकर जमे रहे।कार्यक्रम में पारंपरिक भक्ति गीतों के साथ-साथ लोक रंग से भरपूर प्रस्तुतियों ने भी लोगों का खूब मनोरंजन किया। मेले जैसा माहौल पूरे दिन बना रहा, जहां दूर-दराज के गांवों से आए लोगों ने आयोजन का आनंद लिया।इसी दौरान आयोजित घुड़दौड़ प्रतियोगिता ने भी लोगों का ध्यान खींचा।

विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्य से आए घोड़ों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। फाइनल में रोहतास के अकोढ़ी के सिपाही का घोड़ा प्रथम स्थान पर रहा, जबकि भीतिहारा के राजेंद्र का घोड़ा द्वितीय और जिगना के मुन्ना का घोड़ा तृतीय स्थान पर रहा। विजेताओं को आयोजन समिति द्वारा पुरस्कृत किया गया।आयोजन के अंत में अतिथियों को पगड़ी और माला पहनाकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मुरा बाबा पूजा समिति के अध्यक्ष अजय चौधरी, धुपन सिंह सहित कई ग्रामीणों की अहम भूमिका रही।