बाढ़ में डूबा दियारा, छतों पर सिमटी जिंदगी; राहत के इंतजार में हजारों लोग

गंगा के उफान ने डुमरांव अनुमंडल के दियारा इलाके में तबाही का मंजर खड़ा कर दिया है। दर्जन भर से अधिक गांव और डेरा बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। कई बस्तियों में पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया है, जिससे बड़ी संख्या में परिवारों को छतों पर शरण लेनी पड़ रही है। सड़क और संपर्क मार्ग डूबने से आवागमन बाधित है।

बाढ़ में डूबा दियारा, छतों पर सिमटी जिंदगी; राहत के इंतजार में हजारों लोग

__ महाजी डेरा से श्रीकांत राय के डेरा तक पानी ही पानी, घरों में घुसा बाढ़ का पानी; नाव, भोजन, दवा और पशु चारे के लिए ग्रामीणों की गुहार

केटी न्यूज/डुमरांव।

गंगा के उफान ने डुमरांव अनुमंडल के दियारा इलाके में तबाही का मंजर खड़ा कर दिया है। दर्जन भर से अधिक गांव और डेरा बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। कई बस्तियों में पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया है, जिससे बड़ी संख्या में परिवारों को छतों पर शरण लेनी पड़ रही है। सड़क और संपर्क मार्ग डूबने से आवागमन बाधित है। ऐसे में रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी ग्रामीणों को पानी के बीच जोखिम उठाकर आवाजाही करनी पड़ रही है।बाढ़ की चपेट में महाजी डेरा, पांडे डेरा, श्रीकांत राय का डेरा, लाल सिंह का डेरा, भिक्षु के डेरा, बीस के डेरा, तिलक राय का हाता, रामदास राय का डेरा, नैनीजोर ढाबी और प्रबोध के डेरा समेत कई इलाके हैं। ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ का पानी लगातार फैल रहा है और हालात बिगड़ते जा रहे हैं।

ग्रामीणों विश्वामित्र यादव, अभिषेक यादव, शिवमुनि, लालू शर्मा, रोहित शर्मा, सुदर्शन यादव, आशुतोष प्रसाद और राहुल यादव समेत अन्य ने बताया कि घरों के निचले हिस्से में पानी भर जाने से रहने और खाने-पीने की समस्या खड़ी हो गई है। कई परिवार घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। वहीं, पर्याप्त नाव उपलब्ध नहीं होने से प्रभावित बस्तियों का संपर्क मुश्किल से हो पा रहा है।

__ फसल डूबी, पशु चारे का भी संकट

बाढ़ ने खेती-किसानी को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। सैकड़ों एकड़ में लगी फसल पानी में डूब चुकी है। खेतों के साथ पशुओं के लिए रखा भूसा भी बर्बाद हो रहा है। इससे पशुपालकों के सामने चारे का गंभीर संकट पैदा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी जल्द नहीं उतरा तो पशुओं को बचाना भी चुनौती बन जाएगा।सिमरी प्रखंड के श्रीकांत राय के डेरा में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। संपर्क मार्ग जलमग्न होने से आवागमन लगभग ठप है। ग्रामीणों के अनुसार फिलहाल एक नाव के सहारे आवागमन हो रहा है, जो बड़ी आबादी के लिए पर्याप्त नहीं है।

__ राहत शिविर और चिकित्सा व्यवस्था की मांग

डुमरी भाजपा मंडल के उपाध्यक्ष अरुण राय ने प्रशासन से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर राहत कार्य शुरू करने की मांग की है। उन्होंने राहत शिविरों में तीनों समय भोजन, नाश्ता, बच्चों के लिए दूध, केला व बिस्कुट, शुद्ध पेयजल और वाटर टैंकर उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही सफाई, एंटी-लार्वा छिड़काव और नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए विशेष चिकित्सा शिविर लगाने पर जोर दिया।उन्होंने गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष चिकित्सा सुविधा, सुरक्षित आवास, तंबू अथवा स्कूल-कॉलेज जैसी सुरक्षित इमारतों में ठहराने की व्यवस्था, बिजली, बिस्तर और पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की। महिलाओं के लिए सैनिटरी नैपकिन, मच्छरदानी, आवश्यक कपड़े तथा पशुओं के लिए पर्याप्त सूखा चारा उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अब राहत की घोषणा नहीं, बल्कि मौके पर तत्काल मदद पहुंचाने की जरूरत है।