कक्षा से कॉकपिट तक: डुमरांव के जयपुरिया स्कूल में बच्चों ने महसूस की ‘उड़ान’ की असली दुनिया
डुमरांव के जयपुरिया स्कूल में गुरुवार को आयोजित कॉकपिट सिमुलेशन कार्यक्रम ने छात्रों के लिए पढ़ाई को एक नए आयाम से जोड़ दिया। इस अनोखे आयोजन में केजी से लेकर कक्षा 10 तक के बच्चों ने न सिर्फ विमानन क्षेत्र के बारे में जाना, बल्कि खुद को एक पायलट की भूमिका में भी महसूस किया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी और व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ना था, जो पूरी तरह सफल साबित हुआ।

__ सिमुलेशन प्रोग्राम में टेक-ऑफ, नेविगेशन और लैंडिंग की लाइव ट्रेनिंग, डायरेक्टर अजय पांडे बोले—“बच्चों को भविष्य की तकनीक से जोड़ना ही लक्ष्य”
केटी न्यूज/डुमरांव:
डुमरांव के जयपुरिया स्कूल में गुरुवार को आयोजित कॉकपिट सिमुलेशन कार्यक्रम ने छात्रों के लिए पढ़ाई को एक नए आयाम से जोड़ दिया। इस अनोखे आयोजन में केजी से लेकर कक्षा 10 तक के बच्चों ने न सिर्फ विमानन क्षेत्र के बारे में जाना, बल्कि खुद को एक पायलट की भूमिका में भी महसूस किया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी और व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ना था, जो पूरी तरह सफल साबित हुआ।विद्यालय परिसर में लगाए गए विशेष सिमुलेशन सेटअप के जरिए बच्चों को विमान उड़ाने की पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझाया गया। टेक-ऑफ से लेकर आसमान में संतुलन बनाए रखने और सुरक्षित लैंडिंग तक की बारीकियों को इतने सरल अंदाज में प्रस्तुत किया गया कि छोटे बच्चे भी इसे आसानी से समझ सके।

सिमुलेशन के दौरान छात्रों को कॉकपिट के कंट्रोल पैनल, विभिन्न बटन, स्क्रीन और अलर्ट सिस्टम के कार्यों की जानकारी दी गई।कार्यक्रम में शामिल अनुभवी पायलटों की टीम ने बच्चों को बताया कि उड़ान के दौरान पायलट किन-किन तकनीकी उपकरणों का उपयोग करते हैं और कैसे बदलते मौसम, एयर ट्रैफिक और अन्य चुनौतियों के बीच निर्णय लेते हैं। पायलट जैन और एलेक्स बैक ने छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए उन्हें पायलट बनने की प्रक्रिया, आवश्यक विषयों और ट्रेनिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला और कई छात्रों ने पहली बार विमानन क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा जताई।

विद्यालय के डायरेक्टर अजय पांडे ने इस पहल को छात्रों के समग्र विकास से जोड़ते हुए कहा, “हमारा प्रयास है कि बच्चे सिर्फ किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि आधुनिक तकनीक और वास्तविक अनुभवों से भी सीखें। कॉकपिट सिमुलेशन जैसे कार्यक्रम बच्चों के भीतर नई जिज्ञासा और आत्मविश्वास पैदा करते हैं, जो उनके भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।”प्रधानाध्यापिका रंजीथम सेबास्टियन के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों की भी सक्रिय भूमिका रही। पूरे आयोजन ने छात्रों को न केवल नई जानकारी दी, बल्कि उनके अंदर वैज्ञानिक सोच और तकनीकी समझ को भी मजबूत किया। कार्यक्रम के अंत में बच्चों ने इस अनुभव को “रोमांचक और प्रेरणादायक” बताते हुए विद्यालय प्रबंधन और पायलट टीम का आभार जताया।

