स्वामी विवेकानंद के विचारों को युवा सिर्फ पढ़े नहीं, बल्कि उसे आत्मसात भी करें - प्रो. अखिलेश दूबे

युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व और कृतित्व को समर्पित एक गरिमामय बौद्धिक प्रबोधन कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय केशवकुंज, झंडेवालान के सभागार में किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिक्षाविदों, विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, सरकारी अधिकारियों, समाजसेवियों, शोधकर्ताओं एवं बुद्धिजीवियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।

स्वामी विवेकानंद के विचारों को युवा सिर्फ पढ़े नहीं, बल्कि उसे आत्मसात भी करें - प्रो. अखिलेश दूबे

-- स्वामी विवेकानंद के विचारों से राष्ट्र निर्माण का संकल्प, बक्सर को विश्व मानचित्र पर उभारने की उठी बुलंद आवाज, बोले प्रोफेसर दूबे बक्सर पौराणिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है

केटी न्यूज/बक्सर

युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व और कृतित्व को समर्पित एक गरिमामय बौद्धिक प्रबोधन कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय केशवकुंज, झंडेवालान के सभागार में किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिक्षाविदों, विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, सरकारी अधिकारियों, समाजसेवियों, शोधकर्ताओं एवं बुद्धिजीवियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वामी विवेकानंद के विचारों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना और राष्ट्र निर्माण में उनकी प्रासंगिकता को रेखांकित करना रहा।कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं संगठन, दिल्ली के उपाध्यक्ष सह बक्सर निवासी प्रो. अखिलेश कुमार दुबे ने बीज वक्तव्य प्रस्तुत किया।

वहीं अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, दिल्ली के संगठन मंत्री माननीय डॉ. बालमुकुंद ने अपने आशीर्वचन से उपस्थितजनों को प्रेरित किया।अपने सारगर्भित संबोधन में प्रो. अखिलेश कुमार दुबे ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का संदेश केवल आध्यात्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि वह शारीरिक, मानसिक, नैतिक और चारित्रिक विकास का समग्र मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे विवेकानंद के विचारों को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि अपने जीवन और कर्म में उतारें।इसी क्रम में प्रो. दुबे ने बिहार के बक्सर जिले को विश्व मानचित्र पर उचित स्थान दिलाने की सशक्त मांग उठाई।उन्होंने कहा कि ‘मिनी काशी’ के नाम से प्रसिद्ध बक्सर पौराणिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है।

रामायण काल से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक बक्सर की भूमिका ऐतिहासिक रही है, किंतु आज भी यह अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने बक्सर की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण, उनके वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने एक स्वर में स्वामी विवेकानंद के विचारों को जीवन में आत्मसात करने, युवा शक्ति को राष्ट्र सेवा से जोड़ने तथा भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने का आह्वान किया। यह बौद्धिक आयोजन न केवल विचारों का आदान-प्रदान बना, बल्कि राष्ट्र और संस्कृति के प्रति नई चेतना जगाने का माध्यम भी सिद्ध हुआ।