दस साल से नारकीय जीवन जीने को मजबूर हरि जी का हाता, शिकायतों के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
डुमरांव नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 22 स्थित थाना के पीछे वाली गली में बसे हरि जी का हाता के लोगों की परेशानी पिछले लगभग दस वर्षों से खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। लगातार आवेदन, शिकायतें, प्रशासनिक आदेश और अखबारों में खबरें प्रकाशित होने के बावजूद इलाके की नारकीय स्थिति जस की तस बनी हुई है।

__ सड़क पर बहती है नाली का पानी, लोक शिकायत प्राधिकार के आदेश भी रहे बेअसर; वार्डवासियों ने उठाए नगर परिषद की कार्यशैली पर सवाल
केटी न्यूज/डुमरांव
डुमरांव नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 22 स्थित थाना के पीछे वाली गली में बसे हरि जी का हाता के लोगों की परेशानी पिछले लगभग दस वर्षों से खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। लगातार आवेदन, शिकायतें, प्रशासनिक आदेश और अखबारों में खबरें प्रकाशित होने के बावजूद इलाके की नारकीय स्थिति जस की तस बनी हुई है। नतीजा यह है कि स्थानीय लोगों को आज भी नाली के गंदे पानी के बीच रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।वार्डवासियों के अनुसार, इस समस्या को लेकर पहली बार 14 सितंबर 2015 को तत्कालीन नगरपालिका प्रशासन को सामूहिक आवेदन दिया गया था। इसके बाद 23 अगस्त 2016, 6 सितंबर 2016 और 20 अक्टूबर 2016 को भी अलग-अलग आवेदन देकर समस्या के समाधान की मांग की गई।

लेकिन जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 22 अक्टूबर 2016 को मामला अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण कार्यालय, डुमरांव के समक्ष रखा गया।शिकायत में नगर विकास विभाग के राज्यादेशों तथा उच्च न्यायालय के प्रासंगिक आदेशों का हवाला देते हुए मांग की गई थी कि सड़क की ऊंचाई बढ़ाने के बजाय नालियों को गहरा किया जाए तथा मुख्य निकासी नाले के तल की गहराई को दुरुस्त किया जाए, ताकि पानी का बहाव सुचारू रूप से हो सके। साथ ही इलाके में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई थी, क्योंकि पूरा मोहल्ला अंधेरे में डूबा रहता था।मामले की सुनवाई के बाद अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने शिकायत को सही पाया और 27 अक्टूबर 2016 को जारी आदेश में नगरपालिका को मार्च 2017 तक समस्या का स्थायी समाधान करने का निर्देश दिया।

हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि आदेश के अनुरूप नाली और नाले की सफाई या गहराई बढ़ाने के बजाय सड़क के ऊपर ही नई सड़क की ढलाई कर दी गई। इससे समस्या कम होने के बजाय और गंभीर हो गई।स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क की ऊंचाई बढ़ जाने से नालियों का पानी अब सीधे सड़क पर बहता है। कई घरों के शौचालयों और आंगनों का निकास द्वार सालों भर गंदे पानी में डूबा रहता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है, जिससे लोगों को आवागमन के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।वार्डवासियों का आरोप है कि इस दौरान कई प्रशासनिक अधिकारी आए और गए, जनप्रतिनिधि बदले, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

“स्वच्छ डुमरांव” के दावों के बीच हरि जी का हाता आज भी बदहाल स्थिति का प्रतीक बना हुआ है।बताया जाता है कि इस मुद्दे को विभिन्न समाचार पत्रों ने भी समय-समय पर प्रमुखता से उठाया, लेकिन जिम्मेदार विभागों की उदासीनता के कारण हालात नहीं बदले। हाल ही में 13 अक्टूबर 2025 को नगर परिषद को फिर से आवेदन देकर समस्या के समाधान की मांग की गई है।अब लोगों की निगाहें नगर परिषद पर टिकी हैं। बड़ा सवाल यह है कि इस बार भी केवल सड़क के ऊपर सड़क बनाने की परंपरा दोहराई जाएगी या फिर नाले और नालियों की वास्तविक समस्या का तकनीकी समाधान कर इलाके के लोगों को वर्षों पुरानी त्रासदी से राहत दिलाई जाएगी।

