डुमरी में दलित बस्ती की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त, 6 अधिकारियों को नोटिस

आजादी के 75 वर्ष बाद भी अनुमंडल के जिले के डुमरी पंचायत वार्ड संख्या 5 की दलित बस्ती नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। वर्षों से जलजमाव, गंदगी और संक्रामक बीमारियों के खतरे के बीच जी रहे यहां के लोगों की पीड़ा अब आदालत तक पहुंच चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए बिहार सरकार के मुख्य सचिव समेत छह वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

डुमरी में दलित बस्ती की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त, 6 अधिकारियों को नोटिस

केटी न्यूज/डुमरांव। 

आजादी के 75 वर्ष बाद भी अनुमंडल के जिले के डुमरी पंचायत वार्ड संख्या 5 की दलित बस्ती नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। वर्षों से जलजमाव, गंदगी और संक्रामक बीमारियों के खतरे के बीच जी रहे यहां के लोगों की पीड़ा अब आदालत तक पहुंच चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए बिहार सरकार के मुख्य सचिव समेत छह वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

-- नाले पर अतिक्रमण से बिगड़ी हालत

जनहित याचिका में बताया गया है कि बस्ती के सरकारी नाले और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों पर लगभग 25 लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। इससे बारिश का पानी और घरों का गंदा सीवेज गलियों में जमा रहता है। हालात ऐसे हैं कि पूरी बस्ती जलजमाव की चपेट में है और लोगों का जीना दूभर हो गया है।

-- नंगे पांव स्कूल जाने को मजबूर बच्चे

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, बच्चों को स्कूल जाने के लिए गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। वे अपने जूते चप्पल और बैग हाथ में लेकर नंगे पांव सड़कों पर जमा गंदे पानी को पार करते हैं। बदबू और संक्रमण के कारण हमेशा बीमारियों का खतरा बना रहता है।

-- प्रशासन की अनदेखी, कोर्ट की फटकार

ग्रामीणों ने कई बार जिलाधिकारी और अंचलाधिकारी को आवेदन दिया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अंचल अधिकारी के निरीक्षण में भी अतिक्रमण की पुष्टि हुई, बावजूद इसके समस्या जस की तस बनी रही। अब हाईकोर्ट ने इसे जीवन के अधिकार अनुच्छेद 21 का उल्लंघन मानते हुए कड़ा रुख अपनाया है।

-- इन अधिकारियों से मांगा गया जवाब

न्यायालय ने पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है मुख्य सचिव, बिहार सरकार,प्रधान सचिव, पंचायती राज विभाग, जिलाधिकारी, बक्सर, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, बक्सर, प्रखंड विकास पदाधिकारी, डुमरांव, कार्यपालक पदाधिकारी, डुमरी पंचायत

-- याचिका की प्रमुख मांगें

अधिवक्ता मो. अज़ीमद्दीन एवं उनके सहयोगी मंजीत कुमार ने अनुच्छेद 21जीवन का अधिकार का हवाला देते हुए न्यायालय से गुहार लगाई है कि, अतिक्रमणकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई हो तथा नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था बहाल हो तथा बस्तीवासियों को स्वच्छ एवं गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराया जाए।

-- अगली सुनवाई 30 अप्रैल को

मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है। अदालत की सख्ती के बाद अब बस्ती के लोगों में उम्मीद जगी है कि वर्षों से झेल रही इस समस्या का समाधान जल्द निकल सकेगा।