कानून से आगे इंसानियत: जब थाने की चौखट बनी गरीब के लिए न्याय का सहारा
अक्सर पुलिस को लेकर आम लोगों के मन में डर और संकोच रहता है, लेकिन कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र से सामने आई एक घटना ने यह साबित कर दिया कि अगर पुलिस चाहे तो वह कानून के साथ-साथ इंसानियत की मिसाल भी कायम कर सकती है। यहां एक गरीब ठेला चालक को न्याय दिलाने में पुलिस की भूमिका न सिर्फ सराहनीय रही, बल्कि समाज के लिए प्रेरणादायक भी बन गई।
__ कृष्णाब्रह्म थानाध्यक्ष की पहल से गरीब ठेलेवाले को बिना सूद भरे वापस मिला गिरवी रखे आभूषण
केटी न्यूज/कृष्णाब्रह्म
अक्सर पुलिस को लेकर आम लोगों के मन में डर और संकोच रहता है, लेकिन कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र से सामने आई एक घटना ने यह साबित कर दिया कि अगर पुलिस चाहे तो वह कानून के साथ-साथ इंसानियत की मिसाल भी कायम कर सकती है। यहां एक गरीब ठेला चालक को न्याय दिलाने में पुलिस की भूमिका न सिर्फ सराहनीय रही, बल्कि समाज के लिए प्रेरणादायक भी बन गई।कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र के निवासी रमेश नट पेशे से ठेला चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। लगभग एक वर्ष पूर्व उनके पुत्र का सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो जाना उनके लिए जीवन की सबसे बड़ी चुनौती बन गया।

इलाज के लिए पैसे की व्यवस्था न हो पाने पर मजबूरी में रमेश नट ने अपनी पत्नी के सोने के कंगन स्थानीय सोनार के यहां मात्र 20 हजार रुपये में गिरवी रख दिए।समय बीतने के साथ उन्होंने दिन-रात मेहनत कर गहने छुड़ाने की कोशिश की। लेकिन जब वह सोनार की दुकान पहुंचे, तो उनसे मूल रकम के अलावा भारी ब्याज जोड़कर कुल 95 हजार रुपये की मांग की गई। असमर्थता जताने पर सोनार ने गहने लौटाने से इनकार कर दिया।हताश और परेशान रमेश नट ने अंततः कृष्णाब्रह्म थाना पहुंचकर थानाध्यक्ष रवि कुमार से अपनी आपबीती साझा की। पीड़ित की स्थिति को समझते हुए थानाध्यक्ष ने तुरंत मानवीय पहल की और मामले की निष्पक्ष जांच कराई।

सोनार को थाने बुलाकर पूछताछ की गई, जिसके बाद बिना किसी ब्याज के गहने पीड़ित परिवार को वापस दिलवाए गए।इस कार्रवाई से न केवल एक गरीब परिवार को बड़ी राहत मिली, बल्कि पुलिस के प्रति आम जनता का भरोसा भी मजबूत हुआ। थानाध्यक्ष रवि कुमार और कृष्णाब्रह्म पुलिस की इस संवेदनशील पहल की स्थानीय स्तर पर जमकर सराहना हो रही है। बक्सर पुलिस द्वारा इस घटना को सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद लोग पुलिस की मानवीय सोच की खुले दिल से प्रशंसा कर रहे हैं।यह घटना बताती है कि जब पुलिस संवेदनशीलता के साथ कदम बढ़ाती है, तो थाने की चौखट डर नहीं बल्कि न्याय और उम्मीद का प्रतीक बन जाती है।

