मानवता शर्मशार: अस्पताल के शौचालय में मिला नवजात, समाज और व्यवस्था दोनों कटघरे में
शुक्रवार की अहले सुबह चौगाईं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के आपातकालीन वार्ड में वह दृश्य सामने आया, जिसने इंसानियत की आत्मा को झकझोर कर रख दिया। अस्पताल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान में, शौचालय के कमोड से एक नवजात की करुण रुलाई गूंज रही थी। यह कोई आम आवाज नहीं थी, बल्कि उस मासूम की पुकार थी, जिसे जन्म के साथ ही मौत के हवाले कर दिया गया था।
-- आपातकालीन वार्ड के कमोड में पड़ा था नवजात, रोने की आवाज सुन सफाईकर्मी की पड़ी नजर
केटी न्यूज/चौगाई
शुक्रवार की अहले सुबह चौगाईं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के आपातकालीन वार्ड में वह दृश्य सामने आया, जिसने इंसानियत की आत्मा को झकझोर कर रख दिया। अस्पताल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान में, शौचालय के कमोड से एक नवजात की करुण रुलाई गूंज रही थी। यह कोई आम आवाज नहीं थी, बल्कि उस मासूम की पुकार थी, जिसे जन्म के साथ ही मौत के हवाले कर दिया गया था।सुबह करीब चार बजे जब महिला सफाईकर्मी नियमित सफाई के लिए आपातकालीन विभाग पहुंची, तो शौचालय से आती बच्चे के रोने की आवाज सुनकर वह ठिठक गई।

डर और आशंका के बीच जैसे ही उसने दरवाजा खोला, सामने का दृश्य रूह कंपा देने वाला था। एक नवजात शिशु का सिर कमोड के भीतर फंसा था और नन्हा सा शरीर बाहर की ओर लटका हुआ था। यह दृश्य इतना भयावह था कि पल भर के लिए समय जैसे थम गया।घबराई सफाईकर्मी ने तुरंत इसकी सूचना पीएचसी प्रभारी मितेंद्र कुमार को दी। देखते ही देखते अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। डॉक्टर, नर्स और स्टाफ मौके पर पहुंचे, चाइल्ड हेल्पलाइन को बुलाया गया। काफी प्रयासों के बाद उस नन्ही जान को कमोड से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

जांच में पाया गया कि बच्चे का वजन करीब 2.550 किलोग्राम है। शरीर पर हल्की चोटों के निशान जरूर थे, लेकिन चमत्कार यह कि उसकी सांसें अब भी चल रही थीं।प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर देखभाल के लिए नवजात को बक्सर स्थित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार फिलहाल उसकी स्थिति स्थिर है और वह चिकित्सकीय निगरानी में है। इस घटना के प्रकाश में आने के बाद अस्पताल में मौजूद हर आंख नम थी, क्योंकि यह सिर्फ एक मेडिकल केस नहीं, बल्कि संवेदनाओं की परीक्षा थी।

यह घटना कई सवाल छोड़ जाती है। आखिर कौन-सी मजबूरी, कौन-सा डर या सामाजिक दबाव था, जिसने एक मां को अपनी कोख से जन्मे बच्चे को इस तरह छोड़ने पर मजबूर किया, क्या यह केवल एक मां की असहायता है या हमारी सामाजिक व्यवस्था की सामूहिक विफलता।अब प्रशासनिक जांच शुरू हो चुकी है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और दोषियों की पहचान की कोशिश जारी है। लेकिन सच यह है कि उस कमोड से निकली यह नन्ही जिंदगी आज पूरे समाज से जवाब मांग रही है, क्या हम सच में इतने असंवेदनशील हो चुके हैं कि एक नवजात को भी सुरक्षित भविष्य नहीं दे पा रहे।
