चौसा में स्वच्छता के नाम पर खिलवाड़, नदी किनारे बन रहा कचरे का पहाड़
चौसा नगर पंचायत में स्वच्छता अभियान की हकीकत नदी तट पर साफ नजर आ रही है। सरकार जहां शहरों और कस्बों को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए लगातार अभियान चला रही है, वहीं चौसा में नगर पंचायत की कार्यशैली इन दावों की पोल खोल रही है। नगर क्षेत्र से निकलने वाला कचरा खुलेआम सड़क किनारे और सीधे नदी तट पर फेंका जा रहा है। इससे न सिर्फ गंदगी फैल रही है, बल्कि पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
__ नगर पंचायत पर गंभीर सवाल: प्रतिबंध के बावजूद तट पर डंपिंग जारी, ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ा
केटी न्यूज/चौसा
चौसा नगर पंचायत में स्वच्छता अभियान की हकीकत नदी तट पर साफ नजर आ रही है। सरकार जहां शहरों और कस्बों को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए लगातार अभियान चला रही है, वहीं चौसा में नगर पंचायत की कार्यशैली इन दावों की पोल खोल रही है। नगर क्षेत्र से निकलने वाला कचरा खुलेआम सड़क किनारे और सीधे नदी तट पर फेंका जा रहा है। इससे न सिर्फ गंदगी फैल रही है, बल्कि पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।नदी किनारे कचरे के बड़े-बड़े ढेर अब आम दृश्य बन चुके हैं। सड़ते हुए कचरे से उठने वाली तेज दुर्गंध से आसपास के ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो गया है। प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट सामग्री हवा के साथ खेतों, गांवों और बस्तियों तक पहुंच रही है।

इससे खेती-किसानी पर भी असर पड़ने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस नदी तट को स्वच्छ और सुरक्षित रखा जाना चाहिए, उसे ही कचरा घर बना दिया गया है।स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि नदी किनारे कचरा फेंकना पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसके बावजूद नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। जिन पर सफाई व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी है, वही पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने में लगे हैं। इससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है, जो भविष्य में बड़ी समस्या बन सकता है।किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि कचरे से निकलने वाला गंदा पानी और प्लास्टिक उपजाऊ जमीन को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो खेती और जल स्रोत दोनों प्रभावित होंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।गौरतलब है कि करीब दो माह पहले नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी रानी कुमारी ने नदी तट पर कचरा फेंकने पर रोक लगाने का आश्वासन दिया था। उस समय उम्मीद जगी थी कि समस्या का समाधान होगा, लेकिन आज तक हालात में कोई बदलाव नहीं आया। तट पर कचरा फेंकने का सिलसिला पहले की तरह जारी है।अब सवाल यह उठ रहा है कि जब आश्वासन के बाद भी व्यवस्था नहीं सुधरी, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? चौसा के लोग अब केवल वादे नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं, ताकि नदी, पर्यावरण और आमजन का जीवन सुरक्षित रह सके।

