थानों में बदलेगा माहौल: महिला पुलिसकर्मियों को मिलेगा अपना सुरक्षित ठिकाना

अब तक थानों में ड्यूटी के दौरान रहने की असुविधाओं से जूझ रही महिला पुलिसकर्मियों के लिए राहत की बड़ी खबर है। बक्सर जिले के थानों में जल्द ही वह दौर खत्म होने वाला है, जब महिला सिपाहियों को सीमित संसाधनों में किसी तरह एडजस्ट कर रहना पड़ता था। विभाग ने महिला पुलिसकर्मियों की बढ़ती संख्या और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए थाना परिसर में ही महिला पुलिस बैरक के निर्माण को तेज कर दिया है।

थानों में बदलेगा माहौल: महिला पुलिसकर्मियों को मिलेगा अपना सुरक्षित ठिकाना

-- बक्सर जिले के थानों में बन रहे आधुनिक महिला पुलिस बैरक, ड्यूटी के साथ अब सम्मानजनक रहन-सहन भी

केटी न्यूज/डुमरांव

अब तक थानों में ड्यूटी के दौरान रहने की असुविधाओं से जूझ रही महिला पुलिसकर्मियों के लिए राहत की बड़ी खबर है। बक्सर जिले के थानों में जल्द ही वह दौर खत्म होने वाला है, जब महिला सिपाहियों को सीमित संसाधनों में किसी तरह एडजस्ट कर रहना पड़ता था। विभाग ने महिला पुलिसकर्मियों की बढ़ती संख्या और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए थाना परिसर में ही महिला पुलिस बैरक के निर्माण को तेज कर दिया है।शनिवार को बक्सर के पुलिस अधीक्षक शुभम आर्या ने कृष्णाब्रह्म थाना परिसर में नव-निर्मित महिला बैरक भवन का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की बारीकी से जांच की और संबंधित एजेंसी को उच्च गुणवत्ता के साथ कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। एसपी ने बताया कि जिले के सभी थानों में महिला बैरक का निर्माण कराया जा रहा है, ताकि महिला सिपाहियों को ड्यूटी के दौरान सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक वातावरण मिल सके।बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम द्वारा कराए जा रहे इस कार्य के तहत कई थानों में भवन निर्माण पूरा हो चुका है और कुछ जगहों पर हैंडओवर की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।

जिला अभियंता विजय कुमार ने जानकारी दी कि प्रत्येक महिला बैरक की क्षमता 10 बेड की होगी। भवन का निर्माण जी प्लस वन संरचना में किया जा रहा है, ताकि भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जा सके।वर्तमान में जिले के अधिकांश थानों में 5 से 6 महिला सिपाही कार्यरत हैं। कहीं यह संख्या चार है, तो कहीं 6 से 7 तक भी पहुंच जाती है। लेकिन अब तक कई थानों में उनके लिए अलग से बैरक की व्यवस्था नहीं थी। नतीजतन, महिला पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान रहने, आराम करने और निजी जरूरतों को पूरा करने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

महिला बैरक के निर्माण से न केवल उनकी दैनिक समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि उनके मनोबल और कार्यक्षमता में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। सुरक्षित आवास मिलने से वे कानून-व्यवस्था के कार्यों में और अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी भूमिका निभा सकेंगी।कुल मिलाकर, यह पहल सिर्फ भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला पुलिसकर्मियों के सम्मान, सुरक्षा और बेहतर कार्य वातावरण की दिशा में एक मजबूत कदम है। आने वाले दिनों में जब सभी थानों में महिला बैरक पूरी तरह से कार्यरत हो जाएंगे, तब पुलिस व्यवस्था में यह बदलाव साफ नजर आएगा।