आग के तांडव में उजड़ा पशुपालक का सहारा, छह मवेशियों की जिंदा जलकर मौत
चौसा नगर पंचायत क्षेत्र के अखौरीपुर गोला में शनिवार की दोपहर अचानक लगी भीषण आग ने एक पशुपालक परिवार की वर्षों की मेहनत को पलभर में राख कर दिया। वार्ड संख्या-13 स्थित एक छोटे मवेशी चटाल (गौशाला) में लगी आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते पूरी झोपड़ीनुमा गौशाला आग की लपटों में घिर गई।

__ चौसा के अखौरीपुर गोला में गौशाला बनी आग का शिकार, लाखों की संपत्ति खाक, दूध के कारोबार पर छाया संकट
केटी न्यूज/चौसा
चौसा नगर पंचायत क्षेत्र के अखौरीपुर गोला में शनिवार की दोपहर अचानक लगी भीषण आग ने एक पशुपालक परिवार की वर्षों की मेहनत को पलभर में राख कर दिया। वार्ड संख्या-13 स्थित एक छोटे मवेशी चटाल (गौशाला) में लगी आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते पूरी झोपड़ीनुमा गौशाला आग की लपटों में घिर गई। इस अग्निकांड में छह पालतू मवेशियों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य मवेशी बुरी तरह झुलसकर घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।अखौरीपुर गोला निवासी रामेश्वर सिंह छोटे स्तर पर गौशाला बनाकर दूध का कारोबार करते थे। उनके परिवार की आजीविका का मुख्य आधार पशुपालन ही था। गौशाला में कई गाय, भैंस और बकरियां बंधी हुई थीं।

शनिवार दोपहर अचानक गौशाला से आग की लपटें उठने लगीं। जब तक आसपास के लोगों को इसकी भनक लगी, तब तक आग ने पूरी झोपड़ी को अपनी चपेट में ले लिया था।ग्रामीणों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर आग बुझाने और मवेशियों को सुरक्षित निकालने का प्रयास शुरू किया। कई लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मवेशियों को बाहर निकाला, लेकिन आग की भयावहता के कारण आधा दर्जन पशुओं को बचाया नहीं जा सका। आग की चपेट में आने से तीन गाय, एक भैंस और दो बकरियों की मौत हो गई। वहीं कई अन्य मवेशी झुलस गए, जिनका इलाज बाद में पशु चिकित्सकों की टीम ने किया।घटना की सूचना मिलते ही चौसा नगर पंचायत के उप चेयरमैन प्रतिनिधि विकास राज मौके पर पहुंचे।

उन्होंने तत्काल मुफस्सिल थाना, अंचल कार्यालय, पशु चिकित्सा विभाग और अग्निशमन विभाग को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही अग्निशमन दल मौके पर पहुंचा और ग्रामीणों की मदद से काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि तब तक गौशाला, पशुओं का चारा और अन्य सामान पूरी तरह जलकर नष्ट हो चुका था।पीड़ित पशुपालक रामेश्वर सिंह ने बताया कि इस अग्निकांड में उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि पशुपालन और दूध बिक्री से ही उनके परिवार का भरण-पोषण होता था। मवेशियों की मौत से न केवल आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है।घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

उप चेयरमैन प्रतिनिधि विकास राज ने भी अधिकारियों से आपदा राहत प्रावधानों के तहत मुआवजा देने की मांग की है, ताकि पीड़ित परिवार को इस भारी नुकसान से उबरने में मदद मिल सके।इस अग्निकांड ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुशालाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घास-फूस से बनी झोपड़ियों में आग लगने की घटनाएं अक्सर बड़ा नुकसान कर देती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पशुपालकों को आग से बचाव के लिए जागरूक करने और जरूरी इंतजाम उपलब्ध कराने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं में जान-माल की क्षति को कम किया जा सके।

