कतिकनार में मनरेगा योजना में भारी गड़बड़ी का खुलासा, मास्टर रोल में फर्जी उपस्थिति दर्ज होने का आरोप

प्रखंड क्षेत्र के कतिकनार गांव में संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। यहां एक ही योजना के तहत तैयार किए गए दो अलग अलग मास्टर रोल में मजदूरों की उपस्थिति को लेकर भारी गड़बड़ी पाए जाने का आरोप है। मामला 27 जनवरी का बताया जा रहा है, जिसने मनरेगा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कतिकनार में मनरेगा योजना में भारी गड़बड़ी का खुलासा, मास्टर रोल में फर्जी उपस्थिति दर्ज होने का आरोप

केटी न्यूज/केसठ।

प्रखंड क्षेत्र के कतिकनार गांव में संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। यहां एक ही योजना के तहत तैयार किए गए दो अलग अलग मास्टर रोल में मजदूरों की उपस्थिति को लेकर भारी गड़बड़ी पाए जाने का आरोप है। मामला 27 जनवरी का बताया जा रहा है, जिसने मनरेगा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार योजना संख्या 20581626 के अंतर्गत मास्टर रोल संख्या 2191 और 2192 जारी किए गए हैं। मास्टर रोल संख्या 2191 में कुल 10 मजदूर दर्शाए गए हैं, जिनमें 2 महिला और 8 पुरुष शामिल हैं, जबकि मास्टर रोल संख्या 2192 में 3 महिला और 7 पुरुष मजदूरों के नाम दर्ज हैं।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि विभागीय वेबसाइट पर अपलोड की गई ऑनलाइन उपस्थिति में दोनों ही मास्टर रोल में पांचदृपांच महिलाओं और पांच पांच पुरुषों की तस्वीरें दिखाई दे रही हैं।वो अभी एक ही मजदूर दोनों मास्टर रॉल में दिखाई दे रहे है जब की नियम ये बताता है कि जो मजदूर किसी एक मास्टर रॉल में काम कर रहा है वो अगले 15 दिनों तक किसी दूसरे मास्टर रॉल में काम नहीं कर सेट है।यानी कागजों में दर्ज नाम और ऑनलाइन तस्वीरों में स्पष्ट अंतर है।इससे फर्जी हाजिरी और मजदूरी भुगतान में गड़बड़ी की आशंका और भी गहराती जा रही है।स्थानीय सूत्रों का कहना है कि कई जॉब कार्डधारी मजदूर स्वयं कार्य स्थल पर काम नहीं करते, बल्कि उनके स्थान पर दूसरे लोग काम करते हैं और भुगतान असली लाभार्थियों के नाम पर निकाल लिया जाता है।

आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में बिचौलियों और कुछ संबंधित कर्मियों की मिलीभगत से मनरेगा की राशि की कथित रूप से बंदरबांट की जाती है।ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब कतिकनार या आसपास के क्षेत्रों में मनरेगा योजनाओं में फर्जी मास्टर रोल, गलत उपस्थिति और गुणवत्ता विहीन कार्य की शिकायत सामने आई हो। पूर्व में भी इस तरह के मामले उजागर हुए हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में ऐसे अनियमित मामलों को बढ़ावा मिलता रहा है।सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पूरे मामले पर अब तक संबंधित विभागीय अधिकारी मौन साधे हुए हैं। न तो किसी तरह की जांच की घोषणा की गई है और न ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के संकेत मिले हैं।

जबकि नियम के अनुसार उक्त योजना के अभिकर्ता पंचायत के रोजगार सेवक होते हैं और उन्हीं की देखरेख में कार्य संपादित कराया जाता है। ऐसे में इतनी बड़ी गड़बड़ी पंचायत रोजगार सेवक की भूमिका पर भी सवाल खड़े करती है।बताया जाता है कि इस मामले की खबर प्रकाशित न हो, इसके लिए कथित रूप से पंचायत स्तर से जुड़े कुछ बिचौलियों द्वारा पत्रकार को धमकाने और मामले को मैनेज करने की कोशिश भी की गई। वहीं कुछ पंचायत समिति सदस्यों द्वारा भी खबर को रोकने और आपसी समझौते की बात कहे जाने की चर्चा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि ईमानदारी से जांच कराई जाए तो प्रखंड क्षेत्र में मनरेगा की कई ऐसी योजनाएं सामने आ सकती हैं, जहां न तो प्राक्कलित राशि का बोर्ड लगाया गया है और न ही कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक है। विशेष रूप से मिट्टी कार्य से जुड़ी योजनाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितता और राशि की कथित सेंधमारी की बात कही जा रही है।अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाता है।

बयान

मामले की जानकारी नहीं थी, मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है। इसकी जांच करवा संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। - विजय कुमार सौरव, प्रखंड विकास पदाधिकारी, केसठ।