कड़ाके की ठंड में पशुधन की ढाल बनी मोबाइल वेटेनरी एंबुलेंस
लगातार गिरते तापमान और शीतलहर के बीच जहां जनजीवन अस्त-व्यस्त है, वहीं पशुधन पर इसका असर कहीं अधिक गंभीर रूप से सामने आ रहा है। प्रखंड क्षेत्र और आसपास के गांवों में कड़ाके की ठंड ने पशुओं की सेहत पर सीधा हमला बोला है। गाय, भैंस, बकरी और बछड़ों में सर्दी से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर नवजात और वृद्ध पशु हाइपोथर्मिया, निमोनिया, कमजोरी और भूख न लगने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिससे पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है।
-- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल, पशुपालकों के लिए उम्मीद की किरण
केटी न्यूज/चौसा
लगातार गिरते तापमान और शीतलहर के बीच जहां जनजीवन अस्त-व्यस्त है, वहीं पशुधन पर इसका असर कहीं अधिक गंभीर रूप से सामने आ रहा है। प्रखंड क्षेत्र और आसपास के गांवों में कड़ाके की ठंड ने पशुओं की सेहत पर सीधा हमला बोला है। गाय, भैंस, बकरी और बछड़ों में सर्दी से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर नवजात और वृद्ध पशु हाइपोथर्मिया, निमोनिया, कमजोरी और भूख न लगने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिससे पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है।

-- पशुपालकों के लिए संजीवनी बनी सेवा
ऐसे हालात में मोबाइल वेटेनरी एंबुलेंस सेवा ग्रामीण पशुपालकों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं साबित हो रही है। ठंड और कोहरे की परवाह किए बिना मोबाइल वेटेनरी टीम गांव-गांव पहुंचकर बीमार पशुओं का त्वरित और निःशुल्क इलाज कर रही है। पशु चिकित्सक डॉ. अजय प्रकाश यादव के नेतृत्व में परावेट अमित सिंह और चालक शत्रुधन सिंह की टीम लगातार क्षेत्र में सक्रिय है।यह टीम न केवल प्राथमिक उपचार बल्कि गंभीर मामलों में तुरंत दवा, इंजेक्शन और जरूरी परामर्श देकर पशुओं की जान बचाने में अहम भूमिका निभा रही है।

-- इलाज के साथ जागरूकता पर जोर
मोबाइल वेटेनरी एंबुलेंस की खास बात यह है कि इलाज के साथ-साथ पशुपालकों को जागरूक भी किया जा रहा है। टीम किसानों को सलाह दे रही है कि पशुओं के आवास को ठंडी हवाओं से सुरक्षित रखें, सूखा और गर्म बिछावन दें, गुनगुना पानी पिलाएं और संतुलित आहार सुनिश्चित करें। साथ ही समय पर टीकाकरण और नवजात पशुओं की विशेष देखभाल पर भी जोर दिया जा रहा है।

-- गांव-गांव पहुंची राहत
बुधवार को सरेंजा, कठतर, राजापुर और बनारपुर गांवों में मोबाइल वेटेनरी एंबुलेंस पहुंची, जहां दर्जनों पशुओं का उपचार किया गया। ग्रामीण पशुपालकों सुरेश, जीवन कुमार और राम सिंह ने बताया कि इस सेवा के कारण कई पशुओं की जान बच सकी है। उनका कहना है कि अगर समय पर डॉक्टर नहीं पहुंचते, तो ठंड के कारण भारी नुकसान हो सकता था।

-- ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को सहारा
पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ऐसे में मोबाइल वेटेनरी एंबुलेंस न केवल पशुओं की रक्षा कर रही है, बल्कि किसानों की आजीविका को भी सुरक्षित रखने में अहम योगदान दे रही है। कड़ाके की ठंड में यह सेवा ग्रामीण इलाकों के लिए भरोसे और राहत का बड़ा माध्यम बनकर उभरी है।
