छठ से पहले नगर परिषद की तैयारी पर संकट, टेंडर विवाद में फंसी घाटों की व्यवस्था
छठ महापर्व की तैयारियों के बीच डुमरांव नगर परिषद की निविदा प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। नगर परिषद क्षेत्र के 19 छठ घाटों पर सफाई, रोशनी, सजावट और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निकाली गई निविदा सोमवार को हंगामे की भेंट चढ़ गई। टेंडर खोलने के दौरान संवेदकों के बीच ऐसा विवाद हुआ कि पूरी प्रक्रिया बाधित हो गई।

-- 19 छठ घाटों की सफाई, रोशनी और सजावट के लिए 11 संवेदकों ने डाली थी निविदा; लिफाफे पर घाट का नाम नहीं होने से बढ़ा विवाद, रद्दीकरण के आसार
केटी न्यूज/डुमरांव।
छठ महापर्व की तैयारियों के बीच डुमरांव नगर परिषद की निविदा प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। नगर परिषद क्षेत्र के 19 छठ घाटों पर सफाई, रोशनी, सजावट और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निकाली गई निविदा सोमवार को हंगामे की भेंट चढ़ गई। टेंडर खोलने के दौरान संवेदकों के बीच ऐसा विवाद हुआ कि पूरी प्रक्रिया बाधित हो गई। पारदर्शिता के उद्देश्य से पहली बार अपनाई गई निविदा व्यवस्था की शुरुआत ही विवाद से होने के बाद अब छठ घाटों पर समय से तैयारी पूरी कराने को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।

-- लिफाफे पर घाट का नाम बना विवाद की जड़
जानकारी के अनुसार, छठ पूजा से पहले नगर परिषद क्षेत्र के 19 घाटों पर सफाई, रोशनी, कारपेट बिछाने, सीढ़ियों के निर्माण और घाटों तक पहुंचने वाले रास्तों को दुरुस्त करने के लिए निविदा निकाली गई थी। इसके तहत प्रत्येक घाट के लिए अलग-अलग टेंडर भरने का प्रावधान था। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 26 अक्टूबर को निविदा खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें कुल 11 संवेदकों ने हिस्सा लिया था। टेंडर खोलने के दौरान पता चला कि केवल तीन संवेदकों के लिफाफों पर संबंधित घाट का नाम अंकित था। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। जिन संवेदकों के लिफाफों पर घाट का नाम नहीं लिखा था, उन्होंने इस आधार पर टेंडर को अमान्य मानने पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि निविदा से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां लिफाफे के अंदर मौजूद हैं। ऐसे में केवल बाहरी लिफाफे पर घाट का नाम नहीं होने के आधार पर उनकी निविदा को खारिज करना उचित नहीं होगा। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच बहस तेज हो गई और हंगामे के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

-- लिखित सुझाव भी नहीं आया काम, रद्दीकरण पर विचार
स्थिति बिगड़ती देख कार्यवाहक चेयरमैन विकास कुमार ठाकुर ने कार्यपालक पदाधिकारी और पुलिस बल की मौजूदगी में निविदा खोलने की प्रक्रिया पूरी कराने का सुझाव दिया। उन्होंने अपना सुझाव रजिस्टर में लिखित रूप से दर्ज कराया और वहां से चले गए। वहीं, पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे स्वच्छता पदाधिकारी राजीव रंजन ने संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर आगे की कार्रवाई पर विचार किया।राजीव रंजन के अनुसार, हंगामे के चलते कामकाज बाधित हुआ और कई लोग वहां से चले गए। ऐसी स्थिति में निविदा रद्द करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, कुछ संवेदकों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यदि उनकी निविदा नियमानुसार सही है, तो पूरी प्रक्रिया रद्द करने के बजाय पात्र संवेदकों को कार्यादेश दिया जाना चाहिए। इससे विवाद और गहरा गया।

-- पारदर्शिता की पहल पर उठे सवाल, समय पर तैयारी बड़ी चुनौती
गौरतलब है कि पहले छठ घाटों की सफाई और अन्य व्यवस्थाएं विभागीय स्तर पर कराई जाती थीं। इस बार पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निविदा का रास्ता अपनाया गया था। लेकिन टेंडर खोलने के दौरान ही विवाद पैदा होने से व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल, निविदा रद्द करने या नियमों के तहत आगे की कार्रवाई करने पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। छठ महापर्व नजदीक होने के कारण नगर परिषद के सामने अब 19 घाटों पर समय रहते सफाई, रोशनी और अन्य सुविधाएं सुनिश्चित करने की चुनौती है। निविदा विवाद का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो छठ घाटों की तैयारियों में देरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।


