न्यायालयीय काम में लापरवाही भारी, शिक्षा विभाग के लिपिक पर गिरी गाज

जिला शिक्षा विभाग ने कार्य में लापरवाही और प्रशासनिक अनुशासनहीनता के मामले में सख्त कदम उठाते हुए एमपी उच्च विद्यालय, बक्सर के लिपिक विनोद कुमार पाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर न्यायालयीय कार्यों में बाधा उत्पन्न करने, उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना करने और कार्यालयीन अभिलेखों के रखरखाव में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप है।

न्यायालयीय काम में लापरवाही भारी, शिक्षा विभाग के लिपिक पर गिरी गाज

__ रिकॉर्ड संधारण में अनियमितता और आदेशों की अनदेखी के आरोप में विनोद कुमार पाल निलंबित, विभागीय कार्रवाई शुरू

केटी न्यूज/बक्सर।

जिला शिक्षा विभाग ने कार्य में लापरवाही और प्रशासनिक अनुशासनहीनता के मामले में सख्त कदम उठाते हुए एमपी उच्च विद्यालय, बक्सर के लिपिक विनोद कुमार पाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर न्यायालयीय कार्यों में बाधा उत्पन्न करने, उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना करने और कार्यालयीन अभिलेखों के रखरखाव में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है।जानकारी के अनुसार, निलंबित लिपिक विनोद कुमार पाल जिला अपीलीय प्राधिकार में प्रतिनियुक्त थे। इस दौरान कार्यालय की महत्वपूर्ण पंजियों के संधारण में भारी अनियमितता सामने आई थी।

आगत पंजी, निर्गत पंजी और उपस्थिति पंजी जैसे आवश्यक अभिलेखों को व्यवस्थित तरीके से नहीं रखने को विभाग ने गंभीरता से लिया। मामले को लेकर पीठासीन पदाधिकारी (प्रशासनिक) द्वारा उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था।विभागीय सूत्रों के अनुसार, लिपिक द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया। अधिकारियों ने इसे सरकारी कार्यों के प्रति उदासीनता और अनुशासनहीन आचरण माना। जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद बिहार सरकारी सेवक नियमावली 2005 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया।

निलंबन अवधि के दौरान विनोद कुमार पाल का मुख्यालय प्रखंड संसाधन केंद्र, डुमरांव निर्धारित किया गया है। विभागीय आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उन्हें नियमानुसार जीवन-यापन भत्ता तभी देय होगा, जब निर्धारित मुख्यालय से उनकी नियमित उपस्थिति विवरणी प्राप्त होगी।विभाग ने मामले की आगे की जांच के लिए संचालन पदाधिकारी और उपस्थापन पदाधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। जांच के दौरान आरोपों से जुड़े सभी तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। जिला शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई को प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन कायम रखने की दिशा में उठाया गया कड़ा कदम माना जा रहा है।