पर्यावरणीय वादों पर उठे सवाल, रोजगार पर भी टकराव
प्रधानमंत्री कार्यालय स्तर पर संज्ञान लिए जाने के बावजूद थर्मल पावर प्लांट से जुड़े पर्यावरण और रोजगार के मसलों पर शनिवार को हुई किसान प्रबंधन वार्ता किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। प्लांट के सभागार में आयोजित बैठक में किसानों और सामाजिक संगठनों ने वर्षों से लंबित पर्यावरणीय दायित्वों और स्थानीय युवाओं को रोजगार न मिलने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया, लेकिन कंपनी प्रबंधन की ओर से स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलने पर बैठक बेनतीजा समाप्त हो गई।
-- थर्मल पावर प्लांट प्रबंधन, किसान वार्ता विफल, 10 जनवरी को सांकेतिक महाधरना का ऐलान
केटी न्यूज/चौसा
प्रधानमंत्री कार्यालय स्तर पर संज्ञान लिए जाने के बावजूद थर्मल पावर प्लांट से जुड़े पर्यावरण और रोजगार के मसलों पर शनिवार को हुई किसान प्रबंधन वार्ता किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। प्लांट के सभागार में आयोजित बैठक में किसानों और सामाजिक संगठनों ने वर्षों से लंबित पर्यावरणीय दायित्वों और स्थानीय युवाओं को रोजगार न मिलने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया, लेकिन कंपनी प्रबंधन की ओर से स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलने पर बैठक बेनतीजा समाप्त हो गई।

बैठक की अध्यक्षता कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने की। इसमें भारतीय किसान यूनियन (बिहार-झारखंड) के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश कुमार सिंह, प्रभावित किसान खेतिहर मजदूर मोर्चा के मुख्य संयोजक अश्विनी कुमार चौबे सहित कई किसान नेता और प्रतिनिधि मौजूद रहे। किसानों का कहना था कि वर्ष 2016 में पूरे किए जाने वाले पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई कार्य आज तक अधूरे हैं, जिससे क्षेत्र में प्रदूषण की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।

दिनेश कुमार सिंह ने डंपिंग कोल यार्ड से फैल रहे प्रदूषण को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि इसका सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार ध्यानाकर्षण के बावजूद कंपनी ने न तो प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए और न ही स्थानीय समुदाय को राहत देने की दिशा में ठोस पहल की। साथ ही, उन्होंने योग्य होने के बावजूद प्रभावित किसानों और क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को नौकरी न दिए जाने का मुद्दा भी उठाया।

बैठक में मोर्चा के सचिव बृजेश राय, उपाध्यक्ष नन्दलाल सिंह, उप सचिव सह मीडिया प्रभारी मुन्ना तिवारी, डॉ. विजय नारायण राय, शिवदयाल सिंह, ललितेश्वर राय, मेराज खान सहित अन्य प्रतिनिधियों ने भी पर्यावरणीय नुकसान और रोजगार में कथित भेदभाव पर अपनी-अपनी बातें रखीं। किसान नेताओं का कहना था कि विस्तृत चर्चा के बाद भी कंपनी प्रबंधन की ओर से कोई समयबद्ध या लिखित आश्वासन नहीं दिया गया।

वार्ता विफल रहने के बाद किसानों ने आंदोलन की घोषणा करते हुए बताया कि 10 जनवरी को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक थर्मल पावर प्लांट के समीप पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों को नौकरी/रोजगार देने की मांग को लेकर सांकेतिक एक दिवसीय महाधरना दिया जाएगा। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय के भीतर उनकी विधिसम्मत मांगें पूरी नहीं हुईं, तो अगले चरण में शांतिपूर्ण लेकिन अनिश्चितकालीन आंदोलन के तहत कंपनी का समस्त कार्य बंद कराने की कार्रवाई की जाएगी।
