सिमरी में पैक्स व्यवस्था पर सवाल, सदस्यता से छूटे किसानों ने उठाई पारदर्शिता की मांग

सिमरी प्रखंड की कई पंचायतों में प्राथमिक कृषि साख समिति (पैक्स) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। पैक्स के माध्यम से किसानों को मिलने वाली सुविधाओं और सदस्यता प्रक्रिया को लेकर ग्रामीण किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे पैक्स का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।

सिमरी में पैक्स व्यवस्था पर सवाल, सदस्यता से छूटे किसानों ने उठाई पारदर्शिता की मांग

केटी न्यूज/डुमरांव

सिमरी प्रखंड की कई पंचायतों में प्राथमिक कृषि साख समिति (पैक्स) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। पैक्स के माध्यम से किसानों को मिलने वाली सुविधाओं और सदस्यता प्रक्रिया को लेकर ग्रामीण किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे पैक्स का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।ग्रामीण किसान उपेंद्र नारायण सिंह, सुनीत कुमार, अनिल कुमार सिंह और विनीत कुमार सिंह सहित अन्य किसानों ने बताया कि वे कई वर्षों से पैक्स सदस्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन करते आ रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें सदस्य नहीं बनाया गया।

इसके कारण वे पैक्स के माध्यम से मिलने वाली सुविधाओं से वंचित हैं। किसानों का कहना है कि पैक्स का गठन पंचायत स्तर पर किसानों को उर्वरक, बीज, फसल अधिप्राप्ति और अन्य योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराने के लिए किया गया था।फिलहाल सरकारी निर्देश पर पैक्स के जरिए धान की अधिप्राप्ति तो की जा रही है, लेकिन उर्वरक वितरण, जन औषधि केंद्र जैसी अन्य योजनाएं अब तक प्रभावी रूप से शुरू नहीं हो सकी हैं। किसानों का आरोप है कि ऑनलाइन आवेदन की जांच और स्वीकृति प्रक्रिया में स्पष्टता नहीं है।

कुछ पंचायतों में पैक्स सदस्यों की संख्या अचानक बढ़ी है, जबकि कई पंचायतों में यह संख्या बेहद कम बनी हुई है, जिससे अनियमितता की आशंका जताई जा रही है।किसानों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि पैक्स सदस्यता प्रक्रिया की समीक्षा कर पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए, ताकि सभी पात्र किसानों को समय पर पैक्स का लाभ मिल सके और सरकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो।