जिस स्कूल में गढ़े सपने, वहीं लौटकर अविनाश ने बच्चों को दिखाई कामयाबी की राह

कामयाबी की कहानी जब अपने ही विद्यालय के आंगन में सुनाई जाती है, तो उसका असर किताबों में पढ़े किसी पाठ से कहीं अधिक गहरा होता है। कभी जिस विद्यालय में पढ़कर पहलवान अविनाश कुमार ने अपने सपनों को आकार दिया था, मंगलवार को उसी विद्यालय में लौटकर उन्होंने विद्यार्थियों को सफलता की राह दिखाई।

जिस स्कूल में गढ़े सपने, वहीं लौटकर अविनाश ने बच्चों को दिखाई कामयाबी की राह

__ एशियाई खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले पहलवान का पीएमश्री विद्यालय चौसा में सम्मान, विद्यार्थियों को अनुशासन, मेहनत और निरंतर अभ्यास का दिया मंत्र

केटी न्यूज/चौसा। 

कामयाबी की कहानी जब अपने ही विद्यालय के आंगन में सुनाई जाती है, तो उसका असर किताबों में पढ़े किसी पाठ से कहीं अधिक गहरा होता है। कभी जिस विद्यालय में पढ़कर पहलवान अविनाश कुमार ने अपने सपनों को आकार दिया था, मंगलवार को उसी विद्यालय में लौटकर उन्होंने विद्यार्थियों को सफलता की राह दिखाई। जापान में आयोजित 20वें एशियन गेम्स के बाद घर लौटे अविनाश का चौसा स्थित पीएमश्री विद्यालय में सम्मान किया गया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को लक्ष्य निर्धारित करने, अनुशासन अपनाने और कठिन परिस्थितियों में भी हौसला बनाए रखने का संदेश दिया।

__ सम्मान से बढ़ा विद्यार्थियों का उत्साह

विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानाध्यापक ब्रजेश कुमार एवं विद्यालय परिवार की ओर से अविनाश कुमार को मोमेंटो और शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया। अपने बीच विद्यालय के पूर्व छात्र और खेल जगत में पहचान बनाने वाले पहलवान को पाकर विद्यार्थियों में उत्साह दिखा। अविनाश ने भी विद्यालय से जुड़ी अपनी यादें साझा करते हुए बच्चों को बताया कि सफलता का रास्ता मेहनत और निरंतर प्रयास से होकर गुजरता है।

__ संसाधनों का लाभ उठाएं विद्यार्थी

विद्यार्थियों से संवाद करते हुए अविनाश ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2004 में इसी विद्यालय से बोर्ड की परीक्षा दी थी। उस दौर में विद्यालय में संसाधनों की कमी थी, लेकिन आज विद्यार्थियों को शिक्षा और खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए पहले की तुलना में कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बच्चों से इन सुविधाओं का भरपूर लाभ उठाने और अपने लक्ष्य की दिशा में लगातार मेहनत करने की अपील की।उन्होंने कहा कि शिक्षा हो या खेल, किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए लक्ष्य के प्रति समर्पण, अनुशासन और नियमित अभ्यास बेहद जरूरी है। विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता पहचानकर उसी के अनुरूप तैयारी करनी चाहिए। कठिनाइयों से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ने वाले ही अपने सपनों को हकीकत में बदल सकते हैं।

__ पूर्व छात्र की उपलब्धि से विद्यालय गौरवान्वित

प्रधानाध्यापक ब्रजेश कुमार ने कहा कि विद्यालय के पूर्व छात्र का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना पूरे विद्यालय परिवार के लिए गर्व की बात है। अविनाश की उपलब्धियां विद्यार्थियों को बेहतर करने की प्रेरणा देती हैं। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि मेहनत, लगन और अनुशासन के सहारे बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।उन्होंने उम्मीद जताई कि अविनाश के अनुभवों से विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति गंभीर रहने और पढ़ाई के साथ खेलकूद में भी सक्रिय भागीदारी करने की प्रेरणा मिलेगी। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक और अन्य कर्मी उपस्थित रहे।