कई विभागों की गैरहाजिरी से अधूरी रह गई योजनाओं की समीक्षा

प्रखंड में संचालित सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए शुक्रवार को प्रखंड कार्यालय के सभागार में बीस सूत्री कार्यक्रम समिति की बैठक हुई। बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रगति, उनके क्रियान्वयन में आ रही अड़चनों और आम लोगों से जुड़े मामलों पर चर्चा की गई।

कई विभागों की गैरहाजिरी से अधूरी रह गई योजनाओं की समीक्षा

__ बीस सूत्री समिति की बैठक में आंगनबाड़ी, जन्म प्रमाण पत्र और शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल

केटी न्यूज/डुमरांव।

प्रखंड में संचालित सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए शुक्रवार को प्रखंड कार्यालय के सभागार में बीस सूत्री कार्यक्रम समिति की बैठक हुई। बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रगति, उनके क्रियान्वयन में आ रही अड़चनों और आम लोगों से जुड़े मामलों पर चर्चा की गई। हालांकि, कई विभागों के पदाधिकारी व प्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी के कारण समीक्षा कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अधूरी रह गई।बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष अजयचंद लोदी ने की। इस दौरान बीडीओ मोनालिसा प्रियदर्शिनी, बीपीआरओ रोहिणी कुमारी, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी राहुलधर दुबे, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सौम्या सिन्हा समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी व प्रतिनिधि मौजूद रहे।

समिति के सदस्यों ने कहा कि सरकारी योजनाओं की समीक्षा केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका असर धरातल पर भी दिखाई देना चाहिए। योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं की पहचान कर उनका समयबद्ध समाधान जरूरी है। इसके लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक में मौजूदगी को महत्वपूर्ण बताया गया।बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से मिलने वाली सेवाओं को प्रभावी बनाने और पात्र लाभुकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया। बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में लोगों को होने वाली परेशानियों का मुद्दा भी उठा। समिति ने प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने की आवश्यकता जताई।

शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों पर चर्चा के दौरान विद्यालयों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की गई। सदस्यों ने विद्यालयों में योजनाओं की नियमित निगरानी और कमियों को दूर करने पर जोर दिया।समिति ने अधिकारियों से अपने-अपने विभागों की योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा जनहित से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही, अगली बैठकों में सभी संबंधित विभागों की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत भी रेखांकित की गई।