बाढ़ के सरकारी आंकड़ों पर माले ने उठाए सवाल, नैनीजोर को तत्काल बाढ़ग्रस्त घोषित करने की मांग

बिहार में बाढ़ की भयावह स्थिति और प्रभावित इलाकों में राहत-बचाव व्यवस्था को लेकर शुक्रवार को भाकपा माले ने डुमरांव थाना के समीप प्रदर्शन किया। राज्यव्यापी आह्वान के तहत आयोजित प्रदर्शन के बाद हुई सभा में नेताओं ने सरकार के बाढ़ प्रबंधन और राहत व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए प्रभावित परिवारों तक तत्काल सहायता पहुंचाने की मांग की।

बाढ़ के सरकारी आंकड़ों पर माले ने उठाए सवाल, नैनीजोर को तत्काल बाढ़ग्रस्त घोषित करने की मांग

__ डुमरांव में प्रदर्शन कर बोले माले नेता—राहत के नाम पर खानापूर्ति नहीं, मृतकों का वास्तविक आंकड़ा और पीड़ित परिवारों को मुआवजा दे सरकार

केटी न्यूज/डुमरांव।

बिहार में बाढ़ की भयावह स्थिति और प्रभावित इलाकों में राहत-बचाव व्यवस्था को लेकर शुक्रवार को भाकपा माले ने डुमरांव थाना के समीप प्रदर्शन किया। राज्यव्यापी आह्वान के तहत आयोजित प्रदर्शन के बाद हुई सभा में नेताओं ने सरकार के बाढ़ प्रबंधन और राहत व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए प्रभावित परिवारों तक तत्काल सहायता पहुंचाने की मांग की। इस दौरान बाढ़ से हुई मौतों का वास्तविक आंकड़ा सार्वजनिक करने और मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।सभा में बक्सर जिले के ब्रह्मपुर, चक्की और सिमरी प्रखंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों का मुद्दा विशेष रूप से उठाया गया। माले नेताओं ने कहा कि ब्रह्मपुर उत्तरी क्षेत्र के उत्तरी नैनीजोर, दक्षिणी नैनीजोर, बैरिया, महुआर, गायघाट, हरनाथपुर, गहौना, निमेज और जोगिया समेत कई पंचायतों में बाढ़ से आम जनजीवन प्रभावित है।

नेताओं के अनुसार, बाढ़ की चपेट में आने से अब तक दो लोगों की मौत भी हुई है। उन्होंने इन इलाकों को तत्काल बाढ़ग्रस्त घोषित कर प्रभावित परिवारों को सरकारी सहायता और मुआवजा देने की मांग की।वक्ताओं ने कहा कि उत्तरी नैनीजोर बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में है, इसलिए प्रशासन को यहां विशेष राहत अभियान चलाना चाहिए। प्रभावित परिवारों को भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवा, पशुचारा और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के साथ जरूरत के अनुसार नावों की व्यवस्था करने की मांग की गई।माले नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार बाढ़ से प्रभावित लोगों के आंकड़े तो जारी कर रही है, लेकिन बाढ़ से हुई मौतों का वास्तविक और पारदर्शी आंकड़ा सामने नहीं आ रहा है। उन्होंने जिला एवं प्रखंडवार मृतकों का आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक करने तथा प्रत्येक मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने बाढ़ में बर्बाद फसलों और क्षतिग्रस्त मकानों का तत्काल सर्वे कराने की भी मांग की। साथ ही राहत वितरण में कथित अनियमितता पर रोक लगाकर पंचायत स्तर पर पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की बात कही। नेताओं ने चेताया कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य शिविर, पर्याप्त दवाएं और व्यापक साफ-सफाई अभियान चलाना जरूरी है।सभा को जिला सचिव नवीन कुमार, प्रखंड सचिव धर्मेंद्र यादव, किसान सभा नेता अलख नारायण चौधरी समेत अन्य नेताओं ने संबोधित किया। मौके पर हरेंद्र राम, वीरेंद्र सिंह, नारायण दास, ललन राम, संध्या पाल, पूजा कुमारी, संजय शर्मा, सर्वेश पांडेय, भगवान दास, मो. नासिर हसन, कृष्णा राम, टुनटुन बैठा, रिंकू कुरैशी और बहादुर जी सहित दर्जनों कार्यकर्ता व नागरिक मौजूद रहे।